भारत की क्रिटिकल मिनरल्स की तलाश होगी पूरी: क्या है कनाडा का बड़ा ऐलान

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क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) की आपूर्ति और सप्लाई चेन की रुकावटों को लेकर भारत की परेशानियां अब जल्द खत्म हो सकती हैं। बदलते जियोपॉलिटिक्स के बीच कनाडा ने भारत को दुर्लभ खनिजों की सप्लाई और आपसी समझौते का एक बड़ा प्रस्ताव देकर द्विपक्षीय रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत की है।

कनाडा का भारत को कूटनीतिक और व्यापारिक प्रस्ताव

भारत में कनाडा के हाई कमिश्नर क्रिस्टोफर कूटर ने स्पष्ट किया है कि उनका देश क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भारत के साथ हर तरह से सहयोग के लिए तैयार है। कूटर ने कनाडाई क्षमता का जिक्र करते हुए कहा कि उनका देश इन खनिजों का एक सुपरपावर है और लगातार उत्पादन बढ़ा रहा है। उनके अनुसार, भारत की मांग सूची में शामिल हर दुर्लभ खनिज कनाडा के पास प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। दोनों देश अब न सिर्फ खनिजों की खरीद के लिए अहम समझौतों पर विचार कर रहे हैं, बल्कि एक-दूसरे की सप्लाई चेन में सीधा निवेश करने की योजना पर भी काम कर रहे हैं।

कनाडा के पास मौजूद प्रमुख क्रिटिकल मिनरल्स

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कनाडा के पास 34 विभिन्न प्रकार के दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार मौजूद है, जो भारत की औद्योगिक जरूरतों को पूरा कर सकता है:

  • यूरेनियम

  • निकेल

  • कोबाल्ट

  • लिथियम

  • ग्रेफाइट

  • कॉपर

  • सीजियम

  • सिलिकन मेटल

  • पोटाश

भविष्य की तकनीक में क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग

पिछले करीब डेढ़ साल से वैश्विक स्तर पर दुर्लभ खनिजों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर भारत की उत्पादन क्षमता पर पड़ा है। आधुनिक तकनीक और भविष्य के विकास के लिए इन खनिजों की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) परियोजनाओं में

  • सोलर पैनल के निर्माण में

  • विंड टर्बाइन के संचालन में

  • इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी और पार्ट्स में

  • बड़े पैमाने के एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Energy Storage Systems) में