स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर INDIA गठबंधन में रार, सपा और कांग्रेस आमने-सामने

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मानना है कि सिर्फ बयानों ही नहीं, बल्कि चुनावी सीटों का गणित भी इस दूरी की एक बड़ी वजह है। सपा को आशंका है कि यदि स्वामी गठबंधन में शामिल होते हैं, तो वे उन सीटों पर दावा ठोक सकते हैं जहां से पार्टी के बागी नेता चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही, चर्चा यह भी है कि स्वामी अपनी बेटी और बदायूं से पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य तथा अपने बेटे को भी गठबंधन के कोटे से चुनाव मैदान में उतारना चाहते हैं।

कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियां और नेताओं के बयान

अखिलेश यादव के कड़े रुख के बावजूद यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 2 नवंबर को स्वामी प्रसाद मौर्य से मुलाकात की, जिसकी तस्वीरें सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है।

मुलाकात पर सफाई देते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कहा, “क्या मुझे अपने दोस्तों से मिलना बंद कर देना चाहिए? जो लोग सालों से देश भर में मेरे साथ सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, वे मेरे दोस्त हैं और मैं उनसे मिलता रहूंगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सीटों के बंटवारे पर चर्चा सही समय आने पर होगी और फिलहाल वह किसी को नाराज नहीं कर रहे हैं।

वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी दो टूक अंदाज में कहा कि गठबंधन में रहने या न रहने के लिए उन्हें अखिलेश यादव से किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा गठबंधन कांग्रेस के नेतृत्व में बना है और इस पर अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व ही करेगा। अपनी कांग्रेस प्रभारी से मुलाकात को लेकर उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान की रैली की सफलता पर दोनों के बीच बधाई का आदान-प्रदान हुआ है।

गठबंधन सहयोगियों की अलग-अलग राय

इस पूरे मामले पर यूपी कांग्रेस की नेता आराधना मिश्रा मोना का कहना है कि INDIA गठबंधन किसी एक प्रदेश में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष नेतृत्व द्वारा बनाया गया था। ऐसे में गठबंधन में कौन शामिल होगा, इसका निर्णय शीर्ष स्तर पर ही लिया जाएगा।

दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के भीतर भी इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि वे “छोटे मुंह बड़ी बात” कर रहे हैं और ऐसी बयानबाजी उनकी मानसिकता को दर्शाती है।

बहरहाल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के रुख में आया यह अंतर विपक्षी गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।