बिहार के सहयोगी दलों ने कसी कमर, चिराग पासवान और निशांत कुमार ने NDA के साथ चुनाव लड़ने के दिए संकेत
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए अभी से सियासी बिसात बिछने लगी है। एक तरफ जहां यूपी के प्रमुख दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य बिहार के राजनीतिक दलों ने भी उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने साफ किया है कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यूपी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, हाल ही में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने भी यूपी में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का संगठन मजबूत करने और एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। इन दोनों नेताओं के बयानों ने यूपी की राजनीति में एक नई चर्चा छेड़ दी है।
चिराग पासवान: “यूपी में मजबूत विकल्प के तौर पर उभरेंगे”
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि जल्द ही काशी (वाराणसी) में उनकी पार्टी की एक बड़ी सभा होने जा रही है।
इसके अलावा, लोजपा (रामविलास) का स्थापना दिवस 28 नवंबर को राजधानी लखनऊ में बड़े स्तर पर मनाया जाएगा। चिराग ने दावा किया कि संगठन को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर लगातार काम चल रहा है और चुनाव नजदीक आने तक उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में एक मजबूत दावेदार और विकल्प के रूप में खुद को पेश करेगी।
निशांत कुमार: जेडीयू का संगठन मजबूत करने पर जोर
चिराग पासवान के बयान से ठीक पहले 1 नवंबर को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने भी यूपी के मुगलसराय का दौरा किया था। वहां उन्होंने स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और स्पष्ट तौर पर यूपी में जेडीयू का संगठन मजबूत करने की बात कही थी।
निशांत कुमार ने कहा था कि उनकी पार्टी की मौजूदगी और जनाधार केवल बिहार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों में भी पार्टी का संगठन सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
एनडीए के बैनर तले चुनाव लड़ने की मंशा
निशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में एनडीए के घटक दल के रूप में उतरने की अपनी इच्छा जाहिर की थी। चिराग पासवान और निशांत कुमार के इन हालिया बयानों से यह तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है कि बिहार के ये सहयोगी दल उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की पूरी तैयारी में हैं। हालांकि, चुनाव में सीटों के बंटवारे और औपचारिक गठबंधन को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
