राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की कितनी है पेंशन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में राम मंदिर की व्यवस्थाओं को पेशेवर तरीके से संभालने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। सितंबर 2026 में हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में उनके नाम पर आधिकारिक मुहर लगाई गई। बीते 30 अप्रैल 2026 को ही वायुसेना से रिटायर हुए मिश्रा अब मंदिर प्रबंधन की कमान संभालेंगे।
प्रशासनिक और प्रबंधन के अनुभव को मिली तरजीह राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और मंदिर परिसर के विस्तार को देखते हुए ट्रस्ट को एक अनुभवी प्रशासक की जरूरत थी। एयर मार्शल के पद पर रहते हुए जीतेंद्र मिश्रा ने लंबे समय तक बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं। ट्रस्ट का मानना है कि सेना में उनके विशाल प्रशासनिक और प्रबंधन अनुभव का सीधा फायदा राम मंदिर से जुड़े दैनिक कामकाज, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाने में मिलेगा।
पश्चिमी कमान के चीफ और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाई अहम भूमिका जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर बेहद शानदार रहा है। वे भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान के चीफ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया, जिनमें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में निभाई गई उनकी भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वायुसेना में शीर्ष पदों पर रहने के बाद अप्रैल 2026 में उनकी सेवानिवृत्ति हुई थी, जिसके कुछ ही महीनों बाद उन्हें अयोध्या में यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सैन्य पेंशन के साथ मिलेगा ट्रस्ट का मानदेय इस नई नियुक्ति के साथ ही उनके वित्तीय लाभों और पेंशन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट है। 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, लेवल-16 के अधिकारी (जैसे एयर मार्शल) का अंतिम बेसिक वेतन 2.24 लाख रुपये प्रति माह तक होता है।
सेवानिवृत्ति के बाद नियमों के तहत अंतिम मूल वेतन का 50 फीसदी हिस्सा बेसिक पेंशन के रूप में दिया जाता है। इस आधार पर जीतेंद्र मिश्रा की बेसिक पेंशन करीब 1.12 लाख रुपये प्रति माह बैठती है। इसके अतिरिक्त उन्हें सरकार की ओर से लागू महंगाई राहत (DR) भी मिलती है। रिटायरमेंट के वक्त उन्हें ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसे अन्य वित्तीय लाभ भी प्राप्त हुए हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट में CEO के तौर पर उनकी जिम्मेदारी सैन्य सेवा से पूरी तरह अलग है। इस नए पद के लिए ट्रस्ट की ओर से तय किया गया वेतन या मानदेय उन्हें अलग से मिलेगा। यानी पूर्व एयर मार्शल के तौर पर मिलने वाली पेंशन नियमित रूप से जारी रहेगी और ट्रस्ट की जिम्मेदारी के बदले मिलने वाला वेतन इससे पूरी तरह स्वतंत्र होगा।
