‘खून से लथपथ उनकी तस्वीर कोई नहीं भूल सकता…’ अशोक सिंघल की 100वीं जयंती पर पीएम किया याद
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विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व प्रमुख रहे अशोक सिंघल की 100वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक विशेष लेख लिखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन में सिंघल की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके निस्वार्थ समर्पण के कारण ही आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर संभव हो सका है। पीएम मोदी ने अपने लेख में सिंघल के साथ बिताए गए पुराने दिनों, उनके संगठनात्मक कौशल, सामाजिक समरसता के प्रयासों और उनके गायन से जुड़े संस्मरण साझा किए हैं।
राम मंदिर आंदोलन और 1991 की बोट क्लब रैली
प्रधानमंत्री ने लिखा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल की ऐतिहासिक भूमिका का स्मरण किए बिना उनका कोई भी उल्लेख अधूरा है। उन्होंने 1991 की बोट क्लब रैली में सिंघल के ओजस्वी भाषण और आंदोलन के चरम पर घायल व खून से लथपथ उनकी तस्वीर को याद किया।
मोदी के मुताबिक, आज अगर अयोध्या में भव्य राम मंदिर आकार ले चुका है, तो इसके पीछे सिंघल जैसी विभूतियों का ही संघर्ष है। उन्होंने लिखा, “आज यदि अशोक जी हमारे बीच होते तो अयोध्या में राम मंदिर को देखकर वो सबसे अधिक भावुक और प्रसन्न होते।”
सामाजिक समरसता और कामेश्वर चौपाल का जिक्र
लेख में अशोक सिंघल के सामाजिक समानता के विचारों का भी प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। पीएम मोदी ने बताया कि सिंघल का स्पष्ट मत था कि समाज में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति समान गरिमा का अधिकारी है।
इसी सोच के तहत उन्होंने यह तय किया था कि अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट बिहार के VHP कार्यकर्ता और वंचित वर्ग से आने वाले कामेश्वर चौपाल के हाथों रखी जाए। इसके अलावा, काशी में एक धर्म संसद के दौरान डोम राजा को सम्मानित करने का फैसला भी अशोक सिंघल ने ही लिया था।
1981 का पत्र और कच्छ भूकंप की यादें
अशोक सिंघल के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को साझा करते हुए पीएम मोदी ने 1981 की एक घटना का जिक्र किया। एक युवा कार्यकर्ता के तौर पर संगठन में काम करने के दौरान मोदी को सिंघल का हाथ से लिखा एक पत्र मिला था, जिसमें उन्हें एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम की जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। मोदी ने सिंघल से पत्र पाने को अपने लिए एक यादगार क्षण बताया।
प्रधानमंत्री ने याद किया कि कैसे सिंघल देश के दूर-दराज और विशेषकर गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों की यात्राएं किया करते थे। 2001 में कच्छ में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान भी सिंघल प्रभावितों की मदद के लिए सबसे आगे रहने वाले और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने वाले नेताओं में शामिल थे।
जब 90वें जन्मदिन पर गाया ‘हे मातृभूमि मेरी’
प्रधानमंत्री ने सिंघल के व्यक्तित्व के एक अलग पहलू को सामने रखते हुए उनके गायन की भी तारीफ की। उन्होंने नागपुर की उन बैठकों की याद ताजा की, जहां सिंघल के ‘एकल गीत’ से पूरी बैठक में नई ऊर्जा भर जाती थी। लेख में 2015 के उस वायरल वीडियो का भी जिक्र किया गया है, जिसमें सिंघल ने अपने 90वें जन्मदिन पर ‘हे मातृभूमि मेरी, हे पितृभूमि मेरी’ गाकर सभी को चौंका दिया था।
लेख के अंत में प्रधानमंत्री ने युवाओं से अशोक सिंघल के विराट व्यक्तित्व और आदर्शों से परिचित होने की अपील की है ताकि राष्ट्र के प्रति उनके सपनों को साकार किया जा सके।
