सीबीआई चार्जशीट में खुलासा, पुणे की चाय की दुकान से चल रहा था पेपर लीक का खेल
3 मई को आयोजित हुई और भारी विवादों के बाद रद्द हुई प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) के पेपर लीक मामले में सीबीआई (CBI) की चार्जशीट ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि इस महाघोटाले का एक बड़ा सिंडिकेट किसी हाई-टेक ऑफिस से नहीं, बल्कि पुणे में एक मशहूर कोचिंग सेंटर के बाहर स्थित चाय की दुकान से चल रहा था।
चाय की दुकान से ऐसे बुना गया जाल
सीबीआई जांच के अनुसार, पुणे में ‘मलाक चहा’ नामक चाय की दुकान चलाने वाले शेषराव बजरंग सूर्यवंशी ने परीक्षा के दबाव से जूझ रहे छात्रों को अपना शिकार बनाया।
अप्रैल 2026 में, जब दो अभ्यर्थी उसकी दुकान पर बैठकर परीक्षा की मुश्किलों पर चर्चा कर रहे थे, तो सूर्यवंशी ने उन्हें झांसा दिया कि उसका एक दोस्त डॉक्टर है जो सीधे परीक्षा का पेपर उपलब्ध करा सकता है। इसके बदले उसने प्रति छात्र 4.5 लाख रुपये की मांग की। डील पक्की होने के बाद, सूर्यवंशी 28 अप्रैल को उन दोनों सहित कुल 10 छात्रों को नासिक के पंचक गांव ले गया। गारंटी के तौर पर उसने सभी छात्रों के ओरिजिनल एजुकेशनल सर्टिफिकेट्स (Original Certificates) जब्त कर लिए थे।
‘सेफ हाउस’ में 4 दिन तक कैद रहे छात्र, रटवाए गए जवाब
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, इस सिंडिकेट के तार नासिक में पकड़े गए करियर काउंसलर शुभम खैरनार और नांदेड़ की एक एजुकेशनल कंसल्टेंसी से जुड़े थे।
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शुभम खैरनार ने नांदेड़ के कंसल्टेंट नागेश दांडे के माध्यम से नासिक के पंचक गांव में 75,000 रुपये में एक मकान 4 दिन के लिए किराए पर लिया था।
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खैरनार ने दांडे को बायोलॉजी और केमिस्ट्री के 550 से अधिक सवालों की पीडीएफ फाइलें (PDF Files) भेजीं, जिनके आठ सेट प्रिंट किए गए।
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दांडे ने छात्रों के सामने खुद को डॉक्टर बताकर प्रश्नपत्र बांटे।
इन छात्रों को 28 अप्रैल से 2 मई तक उसी मकान में कैद रखा गया और उत्तर रटवाए गए। ब्लैकमेलिंग के मकसद से सूर्यवंशी ने प्रश्नपत्र पकड़े हुए छात्रों की तस्वीरें भी खींच ली थीं। 2 मई को जब छात्रों को वहां से छोड़ा गया, तो एक छात्र ने चालाकी से अपने मोबाइल से पर्चे स्कैन कर लिए थे।
मां ने गहने गिरवी रखकर चुकाए 3 लाख रुपये
3 मई को परीक्षा खत्म होते ही सूर्यवंशी ने उगाही शुरू कर दी। सीबीआई जांच में सामने आया है कि एक छात्र पर अपनी चाय की दुकान पर 3 लाख रुपये नकद देने का दबाव बनाया गया। मजबूर होकर उस छात्र की मां ने अपने सोने के गहने गिरवी रखे और सूर्यवंशी को पैसे चुकाए।
डिजिटल सबूत ने खोला राज
सीबीआई ने इस मामले में शेषराव सूर्यवंशी को 14वें आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया था और इसी सप्ताह उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। 2 सितंबर को गिरफ्तारी के बाद जब उसके मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच हुई, तो उसमें 30 अप्रैल की एक छात्रा की तस्वीर मिली, जिसके हाथ में लीक हुए प्रश्नपत्र की फोटोकॉपी थी। इस अहम डिजिटल सबूत ने पुणे से नासिक तक फैले इस पूरे पेपर लीक सिंडिकेट (Paper Leak Syndicate) को बेनकाब कर दिया।
