‘हफ्ता तो नहीं वसूल रहे?’ BEST बस स्टैंड की जमीन पर अतिक्रमण न हटाने से भड़का सुप्रीम कोर्ट, BMC कमिश्नर का वेतन रोका, अवमानना नोटिस जारी

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मुंबई में ‘बेस्ट’ (BEST) के बस स्टैंड के लिए आरक्षित जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने अपने पुराने आदेशों का पालन न होने पर बीएमसी कमिश्नर को अवमानना (Contempt) का नोटिस जारी कर दिया है। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार और नगर निगम को यह सख्त निर्देश दिया है कि जब तक कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह से पालन नहीं हो जाता, तब तक बीएमसी कमिश्नर और उनके निजी स्टाफ का मासिक वेतन (Salary) जारी न किया जाए।

समय मांगने की याचिका खारिज, 5 लाख का जुर्माना

बीएमसी ने कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय मांगते हुए एक आवेदन दाखिल किया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस आवेदन को सिरे से खारिज करते हुए बीएमसी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया। बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कमिश्नर ने जानबूझकर अदालत के 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 के आदेशों की अवहेलना की है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद मुंबई के बोरीवली इलाके में 5,800 वर्ग मीटर जमीन पर हुए अतिक्रमण से जुड़ा है। इसमें से 3,400 वर्ग मीटर की जमीन BEST बस स्टैंड और प्रशासनिक भवन के लिए आरक्षित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को आदेश दिया था कि बीएमसी इस जमीन का कब्जा पराग कंस्ट्रक्शंस से वापस ले, वहां से अतिक्रमण हटाए और बस स्टैंड का निर्माण कार्य पूरा कराए। इसके बाद 28 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में कोर्ट ने बीएमसी को अतिक्रमण हटाने के लिए 3 महीने की मोहलत दी थी। लेकिन, तय समय सीमा में आदेश का पालन न होने पर अब कमिश्नर के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया गया है।

बीएमसी की दलील और जजों की हैरानी

सुनवाई के दौरान बीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील आर.पी. भट्ट ने अदालत को बताया कि अतिक्रमण करने वालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं और उन्हें दो बार सुनवाई का मौका भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद अंतिम आदेश पारित होना बाकी है।

बीएमसी ने एक हलफनामा दाखिल कर यह दलील भी दी कि संबंधित अधिकारी को मराठी भाषा नहीं आती है, इसलिए मराठी दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद कराने में ज्यादा समय लग रहा है। इस तर्क पर जस्टिस जोयमाल्या बागची समेत बेंच के अन्य जजों ने काफी हैरानी जताई।

‘अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट की भाषा समझ नहीं आ रही’

चीफ जस्टिस ने मामले में नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी टिप्पणियां कीं। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं नगर निगम के अधिकारी अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत तो नहीं कर रहे। उन्होंने तीखा सवाल किया, “क्या अधिकारी उनसे हफ्ता या हर महीने पैसे वसूल रहे हैं?”

चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी जानबूझकर कोर्ट के आदेशों में देरी कर रहे हैं और अतिक्रमणकारियों को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भाषा समझ नहीं आ रही है, और अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ, तो उन्हें जेल भी भेजा जा सकता है। बीएमसी के वकील ने 30 दिन के भीतर कार्रवाई पूरी करने का भरोसा दिलाया, लेकिन अदालत ने एक दिन की भी अतिरिक्त मोहलत देने से साफ इनकार कर दिया।