40 दिन के युद्ध में भी नहीं रुका ईरान का तेल निर्यात? मंत्री का बड़ा दावा
ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकडेजाद ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल के साथ चले 40 दिन के युद्ध और भारी सैन्य संघर्ष के दौरान भी देश का कच्चा तेल निर्यात एक घंटे के लिए भी बंद नहीं हुआ। तेल और गैस बुनियादी ढांचे पर लगातार हमलों और समुद्री नाकेबंदी जैसी गंभीर लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के दौरान ईरान ने अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को तेल की आपूर्ति सुचारू रूप से जारी रखी।
युद्ध और हमलों के बीच ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, इस युद्ध के दौरान ईरान के तेल भंडारण, वितरण सुविधाओं और प्रमुख गैस-प्रसंस्करण संयंत्रों को निशाना बनाया गया था। देश के सबसे रणनीतिक ऊर्जा परिसरों में से एक ‘साउथ पार्स गैस कॉम्प्लेक्स’ पर भी हमले किए गए थे। इसके अलावा, 18 मार्च को असलुयेह (Asaluyeh) में चार प्रमुख गैस रिफाइनरियों को भी नुकसान पहुंचाया गया था, जिससे गैस उत्पादन क्षमता में अस्थायी कमी आई थी। हालांकि, ईरानी विशेषज्ञों ने युद्धकालीन परिस्थितियों में ही युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य शुरू कर बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता को बहाल कर दिया है।
समुद्री नाकेबंदी को मात देने की रणनीति ईरान को केवल भौतिक हमलों का ही सामना नहीं करना पड़ा, बल्कि उसे फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में समुद्री नाकेबंदी (Maritime Blockade) जैसी बड़ी व्यापारिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ा। मंत्री पाकडेजाद ने बताया कि रास अल-हड्ड से पाकिस्तान के ग्वा बंदरगाह तक पहली नाकेबंदी के बावजूद ईरानी अधिकारियों ने ऐसे कदम उठाए जिससे तेल की बिक्री और डिलीवरी फारस की खाड़ी से हजारों किलोमीटर दूर तक सुरक्षित तरीके से जारी रखी जा सके।
चीन को होने वाले तेल निर्यात पर भी अमेरिकी आर्थिक युद्ध का कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि तेल उद्योग ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और वे लगातार ऐसे नए रास्ते तलाश रहे हैं ताकि भविष्य में हर तरह की नाकेबंदी को पूरी तरह से दरकिनार किया जा सके।
घरेलू उत्पादन और गैस फ्लेयरिंग में कमी युद्ध जैसे हालातों के बावजूद ईरान ने अपने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखा है:
-
दैनिक उत्पादन: अतिरिक्त 250,000 बैरल प्रतिदिन क्रूड उत्पादन के लक्ष्य पर काम चल रहा है, जिसमें से 70,000 से 80,000 बैरल प्रतिदिन का लक्ष्य हासिल किया जा चुका है।
-
गैस रिकवरी: बर्बाद होने वाली गैस (Flare Gas) को कैप्चर करने के प्रोजेक्ट्स के जरिए अब कुल 17 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति दिन फ्लेयर-गैस एकत्र की जा रही है, जो ऊर्जा दक्षता के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि है।
