अमेरिकी दबाव में झुका दक्षिण कोरिया? फारस की खाड़ी में सैन्य तैनाती पर कर रहा विचार
अमेरिका के लगातार कड़े राजनीतिक दबाव के बीच दक्षिण कोरिया फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में अपनी सैन्य संपत्तियों और बलों को तैनात करने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि इस सामरिक जलमार्ग पर सेना भेजने को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और फिलहाल सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा की जा रही है।
ट्रंप का दबाव और अमेरिकी नाराजगी यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में सहयोग करने से इनकार करने पर दक्षिण कोरिया की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। ट्रंप ने यहां तक कहा था कि इसी वजह से उन्होंने दक्षिण कोरिया के साथ होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को सीमित कर दिया था। इसके बाद से सियोल पर अमेरिकी नेतृत्व वाले अभियानों में अधिक भूमिका निभाने का भारी दबाव है।
तेहरान की चेतावनी और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट दक्षिण कोरिया के लिए फारस की खाड़ी या होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य बल तैनात करना एक संवेदनशील राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा बना हुआ है:
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ईरान की कड़ी चेतावनी: ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि जो भी देश अमेरिकी सैन्य गतिविधियों या मध्य एशिया में अमेरिकी दखल का समर्थन करेंगे, उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।
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समुद्री नाकेबंदी: ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से क्षेत्र में जहाजरानी और व्यापारिक सुरक्षा को लेकर तनाव पहले से ही चरम पर है।
ईरान का तेल निर्यात अब भी जारी दूसरी ओर, ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकडेजाद ने हाल ही में दावा किया है कि अमेरिका-इजरायल के साथ 40 दिन के संघर्ष और समुद्री नाकेबंदी के बावजूद देश का कच्चा तेल निर्यात बिना किसी रुकावट के जारी रहा है। ऐसे में यदि दक्षिण कोरिया अमेरिकी गठबंधन के तहत फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाता है, तो इससे ईरान और सियोल के बीच कूटनीतिक और आर्थिक तनाव पैदा हो सकता है, जिससे दक्षिण कोरिया की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
