September 15, 2026

CJP-अखिलेश यादव मुलाकात: चुनाव लड़ने के सवाल पर रत्ना सिंह का बयान, यूपी की सियासत में चर्चा तेज

akhilesh-yadav

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के बीच हुई मुलाकातों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक तरफ सीजेपी पदाधिकारी आशुतोष रांका की अखिलेश यादव के साथ बंद कमरे में हुई 90 मिनट की मैराथन बैठक चर्चा का विषय बनी हुई है, तो दूसरी तरफ सीजेपी की नेता रत्ना सिंह के एक इंटरव्यू में चुनाव लड़ने को लेकर दिए गए गोलमोल जवाब ने नई सियासी अटकलों को हवा दे दी है।

‘मुझे नहीं पता मैं आगे चुनाव लड़ूंगी या नहीं’ द रेड माइक को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान जब सीजेपी की सौरभ दास और रत्ना सिंह से यह सवाल पूछा गया कि यदि अखिलेश यादव और राहुल गांधी का समर्थन मिलता है, तो क्या वह उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ेंगी? इस पर रत्ना सिंह ने सीधा ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब देने से बचते हुए कहा, “देखिये फ्यूचर का नहीं पता है, क्योंकि मैं बहुत प्रेजेंट में जीने वाली इंसान हूं। मैं हर फैसले को हर दिन लेती हूं और उस दिन को उतना जीती हूं। मुझे नहीं पता कि मैं आगे चलकर चुनाव लड़ूंगी या नहीं या सीजेपी के साथ हूं या क्या कर रही हूं।” उनके इस बयान के बाद CJP की राजनीतिक भूमिका को लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है।

अखिलेश-रांका मुलाकात पर सपा की सफाई रत्ना सिंह के इस बयान से बमुश्किल एक दिन पहले, गुरुवार को लखनऊ में सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सपा मुख्यालय के पास स्थित जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट कार्यालय में अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। करीब डेढ़ घंटे चली इस गुप्त बैठक के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस मुलाकात का कोई राजनीतिक या चुनावी गठबंधन से लेना-देना नहीं था। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने कहा कि यह बैठक मुख्य रूप से आभार जताने के लिए थी, क्योंकि समाजवादी पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के छात्र आंदोलन का समर्थन किया था और संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था।

राजस्थान हमले से लेकर संसद मार्ग तक बढ़ता विरोध सूत्रों के मुताबिक, पिछले महीने राजस्थान में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान आशुतोष रांका पर हुए हमले के बाद अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया था। इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच जेन-जी (Gen-Z) और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले भी सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके को एनडीए (NDA) में शामिल होने का ऑफर दे चुके हैं, जिसे ठुकरा दिया गया था।

फिलहाल, शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग पर सीजेपी का प्रदर्शन और बवाल जारी है। ऐसे में चुनाव लड़ने के सवाल पर सीजेपी नेताओं के सधे हुए बयानों और सपा के साथ बढ़ती मुलाकातों ने यह साफ कर दिया है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में नए समीकरण आकार ले सकते हैं।