September 15, 2026

विदेश में पढ़ाई को लेकर बदली पसंद, भारतीय छात्र नौकरी और बजट पर दे रहे जोर

students

भारतीय छात्र अब केवल नामी विदेशी शिक्षण संस्थानों के ठप्पे के आधार पर विदेश जाने का फैसला नहीं कर रहे हैं, बल्कि उनकी प्राथमिकता में पढ़ाई का कुल खर्च, मिलने वाली नौकरी और करियर का रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट (ROI) सबसे ऊपर आ गया है। कौशल एवं कार्यबल विकास कंपनी ‘अपग्रेड’ (upGrad) की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा रिपोर्ट के अनुसार, करीब 49 प्रतिशत भारतीय छात्र-छात्राओं ने विदेश में पढ़ाई करने का सबसे मुख्य कारण बेहतर रोजगार के अवसरों को बताया है।

यह रिपोर्ट जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच परामर्श लेने वाले 53,800 छात्रों के आंकड़ों पर आधारित है। विश्लेषण से पता चलता है कि छात्र अब प्रतिष्ठा से ज्यादा व्यावहारिक लाभ, शिक्षा की गुणवत्ता, स्थायी निवास (PR) और जीवनशैली को ध्यान में रखकर अपने विकल्प चुन रहे हैं।

छोटे शहरों के छात्रों का बढ़ा दखल, 30 लाख से कम बजट पहली पसंद

रिपोर्ट में शामिल छात्रों में से 65.8 प्रतिशत नए स्नातक (Fresh Graduates) थे, जो अपने करियर के शुरुआती चरण में हैं। इसके अलावा लगभग 60 प्रतिशत छात्र टियर-2 और टियर-3 (मझोले और छोटे) शहरों से ताल्लुक रखते हैं।

विदेश में पढ़ाई को लेकर बजट प्रबंधन में भी बड़ा बदलाव देखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हर 10 में से लगभग 7 छात्र (करीब 70 प्रतिशत) 30 लाख रुपये से कम के कुल बजट में विदेश जाकर डिग्री पूरी करने की योजना बना रहे हैं।

पारंपरिक देशों के मुकाबले यूरोप की ओर बढ़ा रुझान

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पारंपरिक शिक्षा केंद्रों की मांग अब भी बनी हुई है, लेकिन वहां कड़े होते इमिग्रेशन नियमों और बढ़ती लागत ने छात्रों को नए विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है। इसके चलते जर्मनी, फिनलैंड, स्पेन और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों के प्रति भारतीय छात्रों की रुचि तेजी से बढ़ रही है। इन देशों में अपेक्षाकृत कम ट्यूशन फीस, उद्योग की जरूरतों से जुड़े पाठ्यक्रम और पढ़ाई के बाद काम के बेहतर अवसर छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं।

‘छात्रों की सोच में आया बुनियादी बदलाव’

अपग्रेड स्टडी अब्रॉड के विश्वविद्यालय साझेदारी मामलों के उपाध्यक्ष प्रनीत सिंह ने कहा कि विदेश में पढ़ाई को लेकर छात्रों के नजरिए में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि भारतीय छात्र अब भविष्य में रोजगार मिलने की संभावना, करियर में आगे बढ़ने के वास्तविक अवसर और कम खर्च को सबसे अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रनीत सिंह के अनुसार, यूरोपीय देशों की बढ़ती लोकप्रियता भारतीय छात्रों की इसी बदलती और व्यावहारिक सोच को दर्शाती है।