IIT में डराने वाले आंकड़े: 5 साल में 53 छात्रों ने गंवाई जान, 85% सुसाइड केस; मरने वालों में आधे से ज्यादा SC, ST और OBC वर्ग से

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भारत के प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) परिसरों में छात्रों की आत्महत्या और अप्राकृतिक मौतों के डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2020-21 से 2024-25 के बीच देश भर के विभिन्न आईआईटी में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई है। इनमें से 45 मौतें आत्महत्या (Suicide) की थीं, जबकि आठ अन्य अप्राकृतिक मौतें थीं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को IITs द्वारा सौंपे गए इन आंकड़ों में सबसे चिंताजनक बात यह है कि जान गंवाने वाले आधे से ज्यादा छात्र अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी से थे।

हाल के 2 सालों में मौतों के आंकड़ों में तेज इजाफा

आंकड़े बताते हैं कि इस 5 साल की अवधि के आखिरी दो सालों में छात्रों की मौतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

  • साल-दर-साल आंकड़े: 2020-21 में 6, 2021-22 में 6, और 2022-23 में 6 मौतें दर्ज की गईं। लेकिन 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 17 और 2024-25 में 19 हो गया।

  • वर्गवार (Category-wise) मौतें: जनरल कैटेगरी के 23 छात्रों की मौत हुई (कुल मौतों का 43.4%)। वहीं, OBC के 12, SC के 10, ST के 7 और EWS कैटेगरी के एक छात्र की मौत हुई।

  • मार्जिनलाइज्ड वर्गों पर असर: कुल मिलाकर SC, ST और OBC छात्रों की 29 मौतें हुईं, जो कुल मौतों का 54.7% है। OBC और ST छात्रों की सभी मौतें आत्महत्या थीं, जबकि SC छात्रों की 10 मौतों में से 9 को सुसाइड के रूप में दर्ज किया गया।

किन IITs में हुई सबसे ज्यादा मौतें?

डिपार्टमेंट ऑफ हायर एजुकेशन द्वारा कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के सवालों के जवाब में जुटाए गए इन आंकड़ों के अनुसार:

  • IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली और IIT हैदराबाद में सबसे ज्यादा 7-7 मौतें दर्ज की गईं।

  • IIT कानपुर और IIT (BHU) वाराणसी में 6-6 मौतें हुईं।

  • IIT मद्रास में इस दौरान 5 छात्रों ने जान गंवाई।

पढ़ाई का दबाव, अकेलापन और कैंपस में सपोर्ट की कमी

विशेषज्ञों का मानना है कि पढ़ाई का भारी दबाव, अकेलापन, सामाजिक चुनौतियां, फैकल्टी के साथ सीमित बातचीत और भविष्य (नौकरी) की चिंता छात्रों को मानसिक अवसाद की ओर धकेल रही है।

IIT दिल्ली के पूर्व डायरेक्टर प्रो. वी. रामगोपाल राव ने समस्याओं को समय रहते पहचानने और फैकल्टी-स्टूडेंट के बीच संवाद बेहतर करने पर जोर दिया है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए 1 दिसंबर 2025 तक देश के 23 आईआईटी परिसरों में कुल मिलाकर केवल 108 काउंसलर ही मौजूद थे।

जातिगत भेदभाव के आरोप: साहिल वाकोडे की मां ने मांगा इंसाफ

कैंपस में सामाजिक चुनौतियों का एक बड़ा उदाहरण हाल ही में IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद सामने आया। उनकी मां सोनाली वाकोडे ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि साहिल ने परिवार को बताया था कि कैंपस में उसे जातिसूचक बातें कही जाती थीं और परेशान किया जाता था। परिवार लगातार उसकी हिम्मत बढ़ा रहा था, लेकिन वह दबाव नहीं झेल सका। परिवार ने अब इस मामले में क्राइम ब्रांच की जांच और संविधान पर भरोसा जताते हुए अपने बेटे के लिए इंसाफ की मांग की है।