September 15, 2026

हूथी विद्रोहियों का सऊदी अरब पर बड़ा हमला, एयरपोर्ट और अरामको को बनाया निशाना

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यमन के ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने आज सऊदी अरब के रणनीतिक और आर्थिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इन हमलों में अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग खालिद एयर बेस और अभा व जिज़ान स्थित सऊदी अरामको की तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हूथी मीडिया आउटलेट ‘अंसारुल्लाह’ ने टेलीग्राम पर एक बयान जारी कर इन हमलों की जिम्मेदारी ली और इसे ‘सऊदी दुश्मन पर ज़ोरदार और घातक प्रहार’ बताया। दूसरी तरफ, सऊदी नीत गठबंधन ने अभा, खमीस मुशैत, नज्रान और जाज़ान में हमलों की पुष्टि करते हुए नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने पर कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

जेल पर हवाई हमले का पलटवार इस बड़े हमले की तात्कालिक वजह 7 सितंबर को यमन के अल-जौफ प्रांत में अल-हज़म की एक जेल पर हुआ हवाई हमला है। हूथी स्वास्थ्य मंत्रालय और एपी (AP) के मुताबिक, उस हमले में एक बच्चे समेत कम से कम सात लोगों की जान गई थी। घटना के बाद हूथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी गठबंधन पर आरोप लगाते हुए ‘सज़ा और मुंहतोड़ जवाब’ देने की कसम खाई थी, जिसे आज मिसाइलों के जरिए अंजाम दिया गया।

आर्थिक चोट और ‘घेराबंदी के बदले घेराबंदी’ हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ ‘घेराबंदी के बदले घेराबंदी’ की नीति अपना ली है। उनका तर्क है कि यमन के हवाई क्षेत्रों और बंदरगाहों पर सऊदी नाकाबंदी से देश में भारी मानवीय संकट खड़ा हो गया है। इसी के जवाब में वे अरामको की रिफाइनरियों और इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर हमले कर रियाध पर वित्तीय दबाव बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, ग्लोबल ट्रेड के अहम रूट ‘बाब अल-मंदेब’ जलडमरूमध्य पर कब्ज़े को लेकर भी सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेनाओं (IRG) और हूतियों के बीच संघर्ष तेज़ हो गया है।

शांति वार्ता में अपर हैंड की कोशिश 2022 में संयुक्त राष्ट्र (UN) की मध्यस्थता से लागू हुआ युद्धविराम अब लगभग बेअसर हो चुका है। हूथी विद्रोही अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर शांति वार्ताओं में बढ़त हासिल करना चाहते हैं। वे लगातार सीमा-पार हमलों के ज़रिए सऊदी अरब को सना हवाई अड्डे से पाबंदियां हटाने और यमनी बंदरगाहों को पूरी तरह खोलने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

धार्मिक मतभेद और ईरान-सऊदी ‘प्रॉक्सी वॉर’ दोनों पक्षों के बीच यह टकराव सिर्फ एक सीमावर्ती विवाद नहीं है। हूथी विद्रोही ज़ैदी शिया संप्रदाय से आते हैं, जबकि सऊदी अरब सुन्नी बहुल राष्ट्र है। 1980 के दशक में सऊदी ने उत्तरी यमन में मदरसों को फंडिंग दी थी, जिसे हूतियों ने अपनी धार्मिक पहचान मिटाने की कोशिश माना। इसके बाद 2011 की ‘अरब स्प्रिंग’ क्रांति के दौरान यमन में सत्ता परिवर्तन हुआ और 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर कब्ज़ा कर तत्कालीन राष्ट्रपति हादी को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

इसके जवाब में मार्च 2015 में सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ बहुराष्ट्रीय सैन्य गठबंधन बनाकर सैन्य अभियान शुरू किया था। वर्तमान में सऊदी अरब का मानना है कि ईरान हूतियों को वित्तीय मदद, सैन्य ट्रेनिंग और ड्रोन तकनीक दे रहा है। रियाध अपनी दक्षिणी सीमा पर लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं वाले इस सशस्त्र गुट को सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल बाज़ारों के लिए एक बड़ा खतरा मानता है।