September 15, 2026

Bihar Flood: 13 जिलों में सैलाब, 29 लाख लोग चपेट में; जानिए सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके

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Bihar Flood: बिहार में बाढ़ का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा. हालात ये हैं कि राज्य के 13 जिलों में करीब 29 लाख 13 हजार से ज्यादा लोग सैलाब की चपेट में फंसे हुए हैं. कहीं गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है, तो कहीं सड़कें पानी में डूबने से आना-जाना बंद हो गया है. कई जगहों पर तो लोगों के घर-आंगन तक में नदी बह रही है. एक तरफ प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने में लगा है, तो दूसरी तरफ बीमार लोगों तक दवा-इलाज पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं रह गया.

किन-किन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही मचा रही बाढ़?

जिन जिलों में हालात सबसे खराब हैं, उनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल शामिल हैं. इन 13 जिलों के 77 ब्लॉक और 438 पंचायतों में तो जैसे जिंदगी ही थम गई है. हां, इतनी राहत की बात जरूर है कि प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा का पानी थोड़ा धीमा पड़ा है, जिससे कुछ इलाकों में जलस्तर घटने की उम्मीद जगी है.

पटना में गंगा का पानी घटा, लेकिन पुनपुन अब भी खतरनाक स्तर पर

पटना की बात करें तो यहां गंगा का पानी 50.58 मीटर के रिकॉर्ड स्तर से घटकर 50.40 मीटर पर आ गया है. इलाहाबाद से वाराणसी तक गंगा में आई इस गिरावट से पटना को भी आगे राहत मिलने की उम्मीद है. लेकिन पुनपुन नदी अभी भी खतरे के निशान से करीब 3 मीटर ऊपर बह रही है, यानी खतरा अभी टला नहीं है.

कटिहार में तो गंगा और कोसी के मिलने की वजह से जो दबाव बना है, उसने 35 पंचायतों के साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोगों को घेर रखा है. खगड़िया के चौथम इलाके और दियारा क्षेत्रों में बागमती के पानी की वजह से लोगों को नई-नई मुसीबतें का सामना करना पड़ रहा है। वहीं गोपालगंज में गंडक बैराज से सवा लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में प्रशासन ने पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है.

भागलपुर से मुंगेर तक, हर जिले में अलग है बाढ़ की कहानी

भागलपुर का हाल तो ये है कि नेशनल हाईवे-80 पर पानी बह रहा है, जिससे गाड़ियां वहीं की वहीं रुक गई हैं. अकेले इसी जिले में सवा दो लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से घिरे हुए हैं. मुंगेर के बरियारपुर में गंगा खतरे के निशान से सवा मीटर ऊपर बह रही है और सैकड़ों घरों में पानी घुस चुका है. सीवान के दरौली में भी सरयू नदी लाल निशान से आधा मीटर ऊपर बहकर आसपास के इलाकों को डुबो रही है.

बांध टूटने से सारण में बढ़ी आफत, आरा में डूबने से गई जान

ये पानी का दबाव अब भोजपुर के आरा तक भी पहुंच गया है. बड़हरा में तो गंगा इतनी फैल गई कि हालात बेकाबू हो गए, धमार गांव में डूबने से एक 32 साल के युवक की मौत हो गई. इसके अलावा सारण में माही नदी का जमींदारी बांध टूट जाने से हालात और बिगड़ गए हैं. तेज बहाव के साथ पानी सीधे रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है.

शेखपुरा में भी सैलाब का असर अब साफ दिख रहा है. यहां हरोहर नदी का पानी पांच पंचायतों में फैल गया है, जिससे घर तो घर, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र तक डूब गए हैं. यानी बाढ़ के पानी ने लोगों की जिंदगी पटरी से उतार दी है।

स्कूल-पंचायत भवन बने अस्पताल, ऐसे मिल रहा इलाज

बाढ़ में फंसे लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज न भटकना पड़े, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने भी कमर कस ली है. प्रभावित इलाकों के स्कूलों और पंचायत भवनों को अस्थायी तौर पर इलाज केंद्र बना दिया गया है, जहां डॉक्टर और नर्सें तैनात हैं और जरूरी दवाइयां भी मौजूद हैं. विभाग की कोशिश यही है कि लोगों को उनके इलाके में ही इलाज मिल जाए, ताकि उन्हें कहीं दूर न जाना पड़े.

कौन-कौन सी नदियां अब भी बह रहीं खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ऐसे में प्रशासन की नजर जलस्तर पर बनी हुई है. लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने के साथ राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है.