September 16, 2026

गुवाहाटी हाईकोर्ट का अहम फैसला: ‘तलाक-ए-हसन’ भारत में प्रतिबंधित नहीं…

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क्या तीन अलग-अलग मौकों पर ‘तलाक’ बोलकर शादी खत्म की जा सकती है और इसका कानूनी पंजीकरण कैसे होगा? इस संबंध में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आने वाला ‘तलाक-ए-हसन’ भारत में प्रतिबंधित नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों का रजिस्ट्रेशन अब पुराने औपनिवेशिक कानूनों के तहत नहीं, बल्कि असम के नए कानून के तहत ही किया जाएगा।

क्या था पूरा मामला?

हाईकोर्ट में जस्टिस अरुण देव चौधरी की अदालत में एक शख्स ने याचिका दायर कर कहा था कि उसने अपनी पत्नी को मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार ‘तलाक-ए-हसन’ दिया है और वह इसके पंजीकरण की अनुमति चाहता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उसकी शादी 2016 में हुई थी और 2018 से पत्नी अलग रह रही थी। आपसी सुलह की कोशिशें असफल होने के बाद उसने 22 मार्च, 26 अप्रैल और 27 मई को अलग-अलग अंतरालों पर तीन बार तलाक का उच्चारण किया। इसके बाद जब उसने स्थानीय प्राधिकरण के पास इसके पंजीकरण के लिए आवेदन किया, तो पुराना कानून समाप्त हो जाने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका।

अदालत का फैसला और निर्देश

  • तलाक की वैधता: हाईकोर्ट ने माना कि ‘तलाक-ए-हसन’ (जो कि एक बार के तीन तलाक यानी ‘तलाक-ए-बिद्दत’ से अलग है और जिसमें सुलह के अवसर होते हैं) भारत में प्रतिबंधित नहीं है।

  • पुराना कानून खत्म: अदालत ने पुराने बारपेटा प्राधिकरण को निर्देश देने से इनकार करते हुए कहा कि 1935 का पुराना कानून अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए उसके तहत नियुक्त प्राधिकारी पंजीकरण नहीं कर सकते।

  • नए कानून के तहत प्रक्रिया: कोर्ट ने याचिकाकर्ता को असम कंपल्सरी रजिस्ट्रेशन ऑफ मुस्लिम मैरिजेज एंड डिवोर्स एक्ट, 2024 के तहत संबंधित मैरिज एंड डिवोर्स रजिस्ट्रार से संपर्क करने का निर्देश दिया। रजिस्ट्रार पहले पहचान और तलाक की सच्चाई की जांच करेगा, जिसके बाद 2024 के कानून की धारा 12 के तहत पंजीकरण पर फैसला लिया जाएगा। यदि रजिस्ट्रार इनकार करता है, तो धारा 17 के तहत अपील का अधिकार भी होगा।

  • पत्नी को कानूनी अधिकार: अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि सुनवाई के दौरान पत्नी उपस्थित नहीं हुई, इसका मतलब यह नहीं कि उसके अधिकार समाप्त हो गए हैं। पत्नी चाहें तो सक्षम अदालत में जाकर ‘तलाक-ए-हसन’ को चुनौती दे सकती है।