September 16, 2026

बभनी: अधिकारियों ने नहीं सुनी तो ग्रामीणों ने खुद मंगवाई JCB, फिर क्या हुआ!

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बभनी क्षेत्र में सरकारी उदासीनता और लालफीताशाही से हताश ग्रामीणों ने अब अपना रास्ता खुद बनाने की ठान ली है। घघरी ग्राम पंचायत के लोगों ने वर्षों से बदहाल घघरी-बभनी मार्ग के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने के बाद, अब जनसहयोग से सड़क सुधारने का काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों से कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर गांव वालों ने आपसी चंदे से इलाके में जेसीबी (JCB) मशीन उतारी है और रास्ते को आवागमन के लायक बनाया जा रहा है।

लगातार शिकायतों और प्रदर्शन के बाद भी नहीं पसीजा सिस्टम

ग्रामीणों के मुताबिक, इस सड़क की दुर्दशा कोई नई बात नहीं है। ग्राम सभा के गठन के समय से ही यह मार्ग बदहाली का शिकार है। जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग (PWD) समेत तमाम संबंधित अधिकारियों को अब तक आधा दर्जन से अधिक बार लिखित शिकायतें दी जा चुकी हैं। बात सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही; लोगों ने अपनी मांग मनवाने के लिए जून माह में धरना-प्रदर्शन किया और अगस्त में सड़क पर श्रमदान भी किया। सोशल मीडिया के जरिए भी प्रशासन को जगाने की कोशिश हुई, लेकिन व्यवस्था के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

गांव वालों ने लिया जनसहयोग का फैसला, उतरी मशीनें

लगातार निराशा हाथ लगने के बाद स्थानीय निवासी उमंग गुप्ता ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के सामने आपसी सहयोग से इस समस्या का फौरी समाधान निकालने का प्रस्ताव रखा। इस पर सहमति बनने के बाद शोमारु प्रसाद और ओमप्रकाश ने जिम्मेदारी ली और ग्रामीणों से मदद की अपील की। इसके बाद गांव वालों की मदद से सड़क पर जेसीबी बुला ली गई। फिलहाल मशीन के जरिए मार्ग को समतल करने, बड़े गड्ढों को भरने, सोलिंग गिराने, जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने और किनारे उगी झाड़ियों की सफाई का काम चल रहा है।

बरसात में मरीजों और बुजुर्गों का निकलना हो जाता है मुश्किल

गांव वालों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बुनियादी सुविधाओं के लिए भी उन्हें इस कदर संघर्ष करना पड़ रहा है। सड़क पर जगह-जगह जलभराव और कीचड़ के कारण बरसात के मौसम में हालात बदतर हो जाते हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। ग्रामीणों ने साफ किया है कि उनकी ओर से किया जा रहा यह काम सरकारी सड़क निर्माण का विकल्प नहीं है, बल्कि यह उनकी मजबूरी है ताकि कम से कम रोजमर्रा के काम के लिए रास्ता सुरक्षित हो सके।

चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, प्रशासन को अल्टीमेटम

अपने दम पर सड़क को चलने लायक बना रहे ग्रामीणों ने अब प्रशासन को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क की समस्या झेल रहे लोग अब केवल कोरे आश्वासनों के भरोसे नहीं बैठेंगे। अगर अभी भी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मौके का निरीक्षण कर इस मार्ग का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो ग्रामीण व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अपनी नाराजगी जताते हुए गांव वालों ने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार तक की चेतावनी दे दी है।