Anant Chaturdashi 2026: आज अनंत चतुर्दशी, जानें पूजा मुहूर्त, राहुकाल और गणेश विसर्जन का समय

Anant Chaturdashi 2026

Anant Chaturdashi 2026: आज 25 सितंबर 2026, शुक्रवार का दिन है। पंचांग के अनुसार यह भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है। आज अनंत चतुर्दशी मनाई जा रही है, इसलिए भगवान विष्णु की आराधना, अनंत धागा बांधने और गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का खास महत्व रहेगा। आज विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 है। सूर्य दक्षिणायन में हैं और शरद ऋतु चल रही है।

चतुर्दशी तिथि आज रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। इसके समाप्त होते ही पूर्णिमा तिथि लग जाएगी।

तिथि और ग्रहों की स्थिति

  • चतुर्दशी शुरू: 24 सितंबर, रात 11:18 बजे
  • चतुर्दशी समाप्त: 25 सितंबर, रात 11:06 बजे
  • सूर्य राशि: कन्या
  • चंद्र राशि: कुंभ, 26 सितंबर को सुबह 5:33 बजे तक

आज शतभिषा नक्षत्र सुबह 11:22 बजे तक रहेगा। इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र शुरू होगा। शूल योग दोपहर 2:51 बजे तक रहेगा, फिर गण्ड योग लग जाएगा। वहीं, गरज करण सुबह 11:17 बजे तक है और इसके बाद वणिज करण प्रभावी होगा।

सूरज और चंद्रमा का समय

  • सूर्योदय: सुबह 6:11 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 6:14 बजे
  • चंद्रोदय: शाम 5:27 बजे
  • चंद्रास्त: 26 सितंबर को सुबह 5:32 बजे

अनंत चतुर्दशी पूजा का समय

आज अनंत चतुर्दशी की पूजा सुबह 6:11 बजे से रात 11:06 बजे तक की जा सकती है। इस मौके पर भगवान विष्णु के अनंत रूप का पूजन करें और 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करें। मान्यता है कि इसे श्रद्धा से बांधने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

आज के शुभ मुहूर्त

  • अभिजीत काल: दोपहर 11:48 बजे से 12:37 बजे तक
  • अमृत काल: 26 सितंबर की तड़के 3:28 बजे से सुबह 5:05 बजे तक

सुबह का चौघड़िया

  • चर: सुबह 6:11 से 7:41 बजे तक
  • लाभ: सुबह 7:41 से 9:12 बजे तक
  • अमृत: सुबह 9:12 से 10:42 बजे तक
  • काल: सुबह 10:42 से दोपहर 12:13 बजे तक

इन समयों में शुभ काम से बचें

  • राहुकाल: सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक
  • गुलिक काल: सुबह 7:30 बजे से 9 बजे तक
  • यमगंड काल: दोपहर 3:30 बजे से शाम 5 बजे तक

गणेश विसर्जन का महत्व

अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। भक्त गणपति बप्पा की उत्तर पूजा करने के बाद उन्हें विदा करते हैं। विसर्जन से पहले परिवार के सभी लोग गणेश जी की आरती करें, सुख-शांति की कामना करें और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना के साथ बप्पा को विदाई दें।