डेमोक्रेट्स के एजेंडे को रोकने के लिए ट्रंप की खास रणनीति, ‘वीटो पावर’ और एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से करेंगे पलटवार

President Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के बाद एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर अब विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का कब्जा है। इस नई राजनीतिक परिस्थिति से निपटने के लिए ट्रंप और उनकी टीम ने पिछले कई महीनों से एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे डेमोक्रेट्स द्वारा भेजे गए विधेयकों को खारिज करने के लिए अपनी ‘वीटो’ शक्ति का आक्रामक तरीके से इस्तेमाल करेंगे।

‘मिस्टर वीटो’ का हथियार और विधायी गतिरोध

अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को कांग्रेस से पारित किसी भी विधेयक को अस्वीकार करने का अधिकार (वीटो) देता है। ट्रंप ने अपने रुख को साफ करते हुए कहा है, “वो ऐसी चीजें भेजेंगे जो बेतुकी हैं और मैं उन्हें वीटो कर दूंगा।”

ट्रंप की रणनीति का आधार यह है कि किसी भी राष्ट्रपति के वीटो को पलटने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। वर्तमान में डेमोक्रेट्स के पास यह आंकड़ा नहीं है। ऐसे में ट्रंप के वीटो को पलटना लगभग असंभव होगा, जिससे डेमोक्रेट्स का विधायी एजेंडा पूरी तरह ठप हो सकता है। ट्रंप का मानना है कि लगातार वीटो का सामना करने के बाद डेमोक्रेट्स खुद बातचीत की मेज पर आने को मजबूर होंगे।

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से बायपास का रास्ता

वीटो के अलावा ट्रंप प्रशासन कांग्रेस को दरकिनार करने के लिए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स (कार्यकारी आदेश) का सहारा लेने की तैयारी में है। इन आदेशों को लागू करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।

ट्रंप की टीम तीन प्रमुख क्षेत्रों में सीधे फैसले लेने की योजना बना रही है:

  • टैरिफ: क्रिटिकल मिनरल्स और विंड टर्बाइन के आयात पर नए शुल्क लगाना।

  • इमिग्रेशन: अंतरराष्ट्रीय छात्रों और अस्थायी विदेशी कर्मचारियों के वीजा नियमों को और सख्त करना।

  • हाउसिंग: निर्माण और आवास लागत को कम करने के लिए प्रशासनिक उपाय करना।

व्हाइट हाउस के वकील इस बात का भी आकलन कर रहे हैं कि राष्ट्रपति अपने अधिकारों की सीमाओं का कानूनी रूप से कितना विस्तार कर सकते हैं, ताकि अदालतों में इन फैसलों का बचाव किया जा सके।

फंड रोकने की नीति और नौकरशाही में बदलाव

ट्रंप के तरकश में एक और विवादास्पद तीर ‘पॉकेट रिसेशन’ या इम्पाउंडमेंट का है। इसके तहत राष्ट्रपति कांग्रेस द्वारा मंजूर किए गए फंड को खर्च करने से इनकार कर सकते हैं। हाल ही में सितंबर 2026 में ट्रंप ने 810 मिलियन डॉलर के कांग्रेस-स्वीकृत फंड को यह कहते हुए रोक दिया था कि इससे अमेरिकी नागरिकों को लाभ नहीं होगा। गवर्नमेंट अकउंटेबिलिटी ऑफिस (GAO) ने इसे नियमों का उल्लंघन माना है।

इसके साथ ही प्रशासन ‘शेड्यूल F’ आदेश के जरिए संघीय ढांचे में बड़ा बदलाव कर रहा है। इसके तहत लगभग 8,000 उच्च-स्तरीय सरकारी कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा समाप्त कर उन्हें ‘एट-विल’ कर्मचारी बना दिया गया है, जिन्हें बिना कारण बताए हटाया जा सकता है।

कांग्रेस की जांच के खिलाफ कानूनी ढाल

सदन पर नियंत्रण के बाद डेमोक्रेट्स ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कई तरह की जांच शुरू कर सकते हैं। इसके लिए व्हाइट हाउस ने अपनी कानूनी ढाल तैयार कर ली है। प्रशासन के अधिकारियों को सबपोना (समन) और दस्तावेजों की मांग से निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। वकीलों ने न्याय विभाग से इस पर भी कानूनी राय मांगी है कि राष्ट्रपति और उनके सलाहकारों के बीच हुई निजी बातचीत को कांग्रेस की जांच से कैसे दूर रखा जा सकता है।

ट्रंप का वर्तमान रुख सीधे टकराव का है। उनका आकलन है कि शुरुआती महीनों के गतिरोध और वीटो के बाद दोनों पक्षों के बीच अंततः कुछ राजनीतिक सौदे और समझौते होंगे।