US Midterm Elections: ट्रंप की हार के 10 बड़े कारण, महंगाई और ईरान युद्ध ने बिगाड़ा खेल
अमेरिका के मध्यावधि (Midterm) चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। चुनावी रुझान और नतीजे बता रहे हैं कि अमेरिकी जनता ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ अपना कड़ा संदेश दिया है। इस राजनीतिक हार के पीछे केवल एक मुद्दा नहीं, बल्कि कई गंभीर राजनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक कारक जिम्मेदार रहे हैं।
आइए विस्तार से जानते हैं उन 10 प्रमुख कारणों को, जिनकी वजह से अमेरिकी वोटर सत्ताधारी पार्टी से नाराज हुए और चुनाव में रिपब्लिकंस को शिकस्त का सामना करना पड़ा:
1. आसमान छूती महंगाई डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि वे महंगाई पर काबू पाएंगे और जीवन-यापन के खर्च को कम करेंगे। लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट रही। किराना, गैस, स्वास्थ्य बीमा, किराए और क्रेडिट कार्ड के बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई, जिससे आम आदमी का गुस्सा सीधे सत्ताधारी दल पर फूटा।
2. ईरान के साथ महंगा और अनचाहा युद्ध इस चुनाव को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला भू-राजनीतिक मुद्दा ईरान के साथ छिड़ा संघर्ष रहा। लगभग दो-तिहाई अमेरिकी इस सैन्य कार्रवाई के खिलाफ थे। इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की सप्लाई बाधित हुई और पेट्रोल के दाम आसमान छूने लगे। अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की खबरों ने भी अवाम में भारी आक्रोश पैदा किया।
3. आयात शुल्क और टैरिफ नीतियां ट्रंप प्रशासन द्वारा विदेशी सामानों पर लगाए गए भारी आयात शुल्क (Tariffs) ने देश के भीतर महंगाई को और बढ़ा दिया। आयातित वस्तुओं के महंगे होने से सीधा बोझ आम अमेरिकी उपभोक्ता की जेब पर पड़ा, जिससे यह संदेश गया कि सरकार की नीतियां मध्यम वर्ग के अनुकूल नहीं हैं।
4. अर्थव्यवस्था पर व्हाइट हाउस के दावों से मोहभंग व्हाइट हाउस और सरकार के आर्थिक सलाहकार जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े पेश कर रहे थे, लेकिन जमीनी स्तर पर आम नागरिक रोजमर्रा की चीजें खरीदने में खुद को असमर्थ महसूस कर रहा था। सरकार का यह कहना कि ‘महंगाई एक भ्रम या छोटी समस्या है,‘ जनता को नागवार गुजरा।
5. अरबपतियों और मेगा-डोनर्स का बढ़ता दखल चुनावी चक्र में अरबों डॉलर का खर्च और बड़े कॉरपोरेट मेगा-डोनर्स (जैसे एलन मस्क) का खुला समर्थन आम मतदाताओं को रास नहीं आया। जनता के एक बड़े वर्ग को लगने लगा कि नीतियां आम आदमी की भलाई के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा अमीर उद्योगपतियों के इशारे पर बन रही हैं।
6. प्रशासन की कार्यशैली और रक्षा विभाग पर सवाल ईरान संघर्ष के दौरान पेंटागन के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के तख्तापलट जैसे मुद्दों ने विवाद खड़ा किया। विपक्षी डेमोक्रेट्स ने इसे प्रशासनिक तानाशाही के रूप में पेश किया, जिससे स्वतंत्र वोटर ट्रंप प्रशासन से दूर हो गए।
7. आक्रामक और विभाजनकारी बयानबाजी चुनावी कैंपेन के दौरान कुछ सीटों पर ध्रुवीकरण करने वाली और आक्रामक भाषा के इस्तेमाल ने उदारवादी और मध्यमार्गी मतदाताओं को छिटका दिया। इन वोटरों ने संतुलन और स्थिरता के पक्ष में मतदान करना बेहतर समझा।
8. कल्याणकारी योजनाओं में कटौती संघीय बजट घाटे को कम करने के नाम पर स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य सुरक्षा जैसी कल्याणकारी योजनाओं में की गई कटौतियों का सीधा असर बुजुर्गों और कामकाजी परिवारों पर पड़ा। इन तबकों ने इसे अपने अधिकारों पर सीधा हमला माना।
9. डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थानीय रणनीति विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी ने ‘आम आदमी के मुद्दों’ जैसे जीवन-यापन का खर्च और प्रशासन की जवाबदेही पर पूरा फोकस रखा। हाउस में डेमोक्रेटिक लीडर हकीम जेफ़रीज़ द्वारा पेश किए गए स्पष्ट एजेंडे ने निराश मतदाताओं को एक भरोसेमंद विकल्प दिया।
10. मिडटर्म चुनावों का ऐतिहासिक ट्रेंड अमेरिकी राजनीतिक इतिहास का यह एक अनलिखा नियम रहा है कि राष्ट्रपति के कार्यकाल के मिडटर्म चुनावों में अक्सर सत्ताधारी पार्टी को जनता की नाराजगी झेलनी पड़ती है। मौजूदा आर्थिक दबावों ने इस ऐतिहासिक ट्रेंड को और ज्यादा आक्रामक बना दिया।
