होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका का ईरान पर हमला, मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप का कूटनीति पर जोर
अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित ईरान के केशम द्वीप (Qeshm Island) पर हमला किया है। यह कार्रवाई अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले किए गए सीमित और गुप्त हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक कदम बताया है, जिसका उद्देश्य वाणिज्यिक जहाजों पर तेहरान के हमलों को रोकना है।
केशम द्वीप पर 5 धमाके, क्यों अहम है यह जगह?
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को द्वीप पर लगातार पांच धमाकों की आवाज सुनी गई और दो विमानों को भी उड़ान भरते देखा गया। खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप केशम एक रणनीतिक जलमार्ग के मुहाने पर स्थित है। यहां एक बड़ा भूमिगत मिसाइल बेस, नौसेना अड्डा और जल विलवणीकरण (desalination) संयंत्र मौजूद है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका इस द्वीप को निशाना बनाते हुए कई भारी हमले कर चुका है और इसे कब्जे में लेने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है।
चुनाव से पहले सीक्रेट हमलों की रणनीति
डब्ल्यूएसजे की रिपोर्ट बताती है कि वाशिंगटन पिछले कई हफ्तों से ईरान के खिलाफ छोटे स्तर के हमले कर रहा है। बड़े युद्ध की आशंका के संकेतों से बचने के लिए अमेरिका ने जानबूझकर इन सैन्य ऑपरेशनों को गुप्त रखा है। पिछले हफ्ते ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघर्ष की स्थिति पर ब्रीफिंग दी थी। इसके अलावा अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली और हथियारों की तैनाती भी बढ़ा दी है।
ईरान का जवाब- ‘गेंद अब अमेरिका के पाले में’
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब बातचीत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी वाशिंगटन की है। बघाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बदले अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने की मांग दोहराते हुए कहा, “गेंद अब अमेरिका के पाले में है।”
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि तेहरान बातचीत के जरिए तनाव सुलझाने को प्रतिबद्ध है। पेजेशकियन ने जोर देकर कहा कि ईरान दुश्मनों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करेगा और यह संघर्ष किसी भी पक्ष के हित में नहीं है।
युद्ध की अटकलों के बीच ट्रंप का नरम रुख
मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बड़े हमलों की धमकियों के बावजूद, मतदान से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर कूटनीतिक नजर आए। सोमवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरान जल्द से जल्द समझौता चाहता है। यह हो सकता है!”
पत्रकारों से बातचीत में भी उन्होंने पूर्ण युद्ध की संभावनाओं को खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा, “हमारा ईरान के साथ युद्ध हुआ था और हम जीत गए। मुझे नहीं पता कि आप इसे युद्ध भी कहेंगे या नहीं, क्योंकि हमने महीनों से कोई लड़ाई नहीं की है।”
नेतन्याहू का दबाव और अमेरिका का रुख
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब शनिवार को ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई। एक्सियोस (Axios) की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद ईरान पर हमला करने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक वार्ताओं और बातचीत के नतीजों का इंतजार करना चाहते हैं।
