ईरान पर हमले के लिए नेतन्याहू ने ट्रंप पर डाला दबाव, अमेरिका फिलहाल कूटनीति के पक्ष में
ईरान से निपटने की रणनीति को लेकर अमेरिका और इज़रायल के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद ईरान पर फिर से सैन्य हमला किया जाए। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इज़रायल को इस बात की चिंता सता रही है कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के बजाय ईरान के साथ किसी समझौते की ओर बढ़ सकता है।
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच ‘कठिन’ बातचीत
हाल ही में ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने ईरान के साथ अमेरिकी बातचीत में हुई प्रगति और सैन्य अभियान को दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इस बातचीत को लेकर दोनों देशों के रुख में अंतर दिखा। इज़रायल के एक सूत्र ने इसे ‘कठिन’ बताया, जबकि अमेरिकी सूत्र ने इसे ‘सीधी बातचीत’ करार दिया। रविवार को आयोवा में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इस बातचीत को ‘बहुत अच्छा’ बताया, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं कहा।
अमेरिका की दोहरी रणनीति
एक्सियोस की रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप प्रशासन कूटनीतिक बातचीत और सैन्य तैयारी, दोनों को एक साथ लेकर चल रहा है। नेतन्याहू जहां मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद हमले का दबाव बना रहे हैं, वहीं ट्रंप प्रशासन का मकसद बातचीत के जरिए रास्ता तलाशना है, लेकिन जरूरत पड़ने पर बड़े सैन्य अभियान के लिए भी तैयार रहना है।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ बातचीत ठीक चल रही है और उन्हें किसी तरह की जल्दबाजी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका को ईरान के एक या दो परमाणु ठिकानों, विशेष रूप से पिकैक्स माउंटेन में मौजूद एक संदिग्ध भूमिगत परमाणु सुविधा पर ध्यान देने की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति ने भेजा पत्र, कतर कर रहा मध्यस्थता
इस बीच, कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। एक्सियोस के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पिछले हफ्ते ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा था, जिसमें बातचीत दोबारा शुरू करने पर जोर दिया गया था। इसे कई महीनों में अमेरिका की ओर से की गई सबसे बड़ी उच्चस्तरीय पहल माना जा रहा है।
सीधी बातचीत शुरू कराने के लिए कतर भी सक्रिय है। कतर के मध्यस्थों ने रविवार को लगातार तीसरे दिन ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की।
ईरान का रुख: कूटनीति को प्राथमिकता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है। उनके मुताबिक, आगे की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका उनके सवालों का क्या जवाब देता है। अराघची ने कहा कि ईरान कूटनीतिक समाधान के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और उम्मीद जताई कि अमेरिका सैन्य विकल्प के बजाय बातचीत का रास्ता चुनेगा।
