कहीं मेहंदी तो कहीं पूजा की थाली, करवा चौथ पूजा से पहले घरों में बढ़ी चहल-पहल
आज 29 अक्टूबर को करवा चौथ है। सुबह से कई घरों में सरगी, मेहंदी, पूजा की थाली और सजने-संवरने की तैयारियां चल रही हैं। महिलाएं निर्जल व्रत रख रही हैं, लेकिन ज्यादातर का कहना है कि काम-काज में व्यस्त रहने से दिन कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता। परिवार में पति और सास का सहयोग मिलने से तैयारी और सहज हो गई है।

सीमा बताती हैं, “निर्जल व्रत है, लेकिन घर के काम और थाली सजाने में इतनी व्यस्तता रहती है कि भूख-प्यास का ध्यान ही नहीं रहता। मेरी सास सुबह मेरे साथ सरगी बनवाने में लगी हैं। पति और देवर भी साथ लगे हैं काम में हसीं मजाक में दिन कट रहा है। शाम को लेकर बहुत जोश है मै चाहती हूं कि आज ऐसा निखार आये कि पतिदेव एक बार फिर दिल हार बैठे।

सविता कुछ चिंता जताती हुई कहती हैं, “मैं भी निर्जल व्रत पर हूं और काम में व्यस्त रहने से दिन अच्छा कट रहा है। पति और सास दोनों मदद कर रहे हैं। लेकिन चक्रवात अर्नव की चेतावनी सुनकर थोड़ी फिक्र हो रही है। कहा जा रहा है कि बादल छाए रह सकते हैं और लखनऊ में चांद साफ न दिखे। अगर चांद नहीं दिखा तो व्रत कैसे खोलें, यही सोचकर थोड़ा परेशान हूं। फिर भी मन से प्रार्थना कर रही हूं कि मौसम साथ दे।”

रेशमा साझा करती हैं, “निर्जल व्रत रखने वाली हूं, लेकिन घर के काम और बच्चों की देखभाल में इतनी व्यस्त रहती हूं कि शाम कब हो जाती है, पता ही नहीं चलता। मैं लखनऊ में अकेली रहती हूँ लेकिन फिर भी मेरी सास ने फोन पर मेरी बहुत मदद की वो बोलीं कि तुम फिक्र मत करो मई सब बता दूंगी और तुम्हारा काम आसान हो जायेगा। परिवार का साथ मिलने से व्रत बोझ नहीं लगता।”

सरिता बताती हैं, “हर साल की तरह इस बार भी निर्जल व्रत रखा है। काम-काज इतना रहता है कि भूख का अहसास ही नहीं होता। पति ने कहा कि तुम सजने-संवरने में ध्यान दो, बाकी हम देख लेंगे। जोश के साथ सब काम चल रहा है।”

रेशु, “मैं शाम को पार्लर जाकर मेहंदी और हेयर स्टाइल करवाने वाली हूँ। जोश इतना था कि व्रत की थकान का नामो-निशान नहीं। पार्लर से लौटकर कपड़े चुने और थाली सजाने में लग जाउंगी। मेरी सासु मां ने आज पूरी जिम्पूमेदारी अपने ऊपर ले रखी है। दिन अच्जाछे से कट रहा है।
लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में चक्रवात अर्नव के प्रभाव से बादल और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। इससे चांद के दर्शन में देरी या मुश्किल हो सकती है। कई महिलाएं मौसम अपडेट पर नजर रखे हुए हैं।
करवा चौथ की व्रत कथा
परंपरा के अनुसार, एक राजा की पुत्री वीरावती ने करवा चौथ का व्रत रखा। शाम को असहनीय भूख-प्यास के कारण उसने जल्दी चांद देख लिया, जो वास्तव में पेड़ के पत्ते में छिपाकर दिखाया गया था। उसी रात उसके पति की मृत्यु का समाचार मिला। बाद में सही विधि से व्रत पूरा करने और चांद को अर्घ्य देने के बाद पति फिर से जीवित हो गए।
दूसरी कथा करवा नाम की स्त्री की है, जिसने अपने पति को मगरमच्छ से बचाने के लिए कठोर व्रत रखा और देवताओं की कृपा से पति सुरक्षित रहे। इन कथाओं का संदेश यही है कि नियम और श्रद्धा से रखा गया व्रत फलदायी होता है।
आज कई घरों में यही कथा शाम को सुनाई जाएगी। महिलाएं सज-धजकर थाली लेकर चांद के इंतजार में होंगी। पति और सास का सहयोग, काम में व्यस्तता और जोश के बावजूद लखनऊ जैसी जगहों पर मौसम की अनिश्चितता एक नई चिंता लेकर आई है। फिर भी आस्था और परिवार के साथ यह दिन विशेष बना हुआ है।
