SC SIR Hearing: सुप्रीम कोर्ट में CEC मामले की सुनवाई, 17 नवंबर को अगली तारीख

supreme court

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद को लेकर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने मुख्य याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह को चुनाव आयोग (EC) के हलफनामे पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग को भी निर्देश दिया है कि वह इस मामले से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर को होने की संभावना है।

चुनाव आयोग का हलफनामा और कोर्ट की कार्यवाही

इस पूरे मामले में 13 विपक्षी नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। आज हुई सुनवाई के दौरान मुख्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने चुनाव आयोग के हलफनामे का अध्ययन कर उसका जवाब देने के लिए अदालत से 10 दिन का वक्त मांगा। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए चुनाव आयोग को अन्य याचिकाओं पर जवाब देने की अनुमति दे दी।

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में SIR का बचाव किया है। आयोग का तर्क है कि उसकी तरफ से फॉर्म 6 में किसी भी तरह का कोई बदलाव (संशोधन) नहीं किया गया है।

फॉर्म 6 को लेकर विरोधाभास और विपक्ष का निशाना

चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म 6 को लेकर दिए गए तर्क पर नया विवाद शुरू हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने आयोग के दावों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ECI ने अपने हलफनामे में बताया है कि घोषणा-पत्र फॉर्म 6 का हिस्सा नहीं है, जबकि 26 सितंबर 2026 की अपनी ही प्रेस विज्ञप्ति में आयोग ने कहा था कि SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ संलग्न घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। भारद्वाज ने चुनाव आयोग पर जवाबदेही से बचने के लिए शब्दों का खेल खेलने का आरोप लगाया।

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा, “हम कितनी उलझी हुई जाल बुन लेते हैं। जब हम पहली बार धोखा देने की कोशिश करते हैं।”

पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार का बयान

फॉर्म 6 के विवाद पर पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने भी प्रतिक्रिया दी है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने हलफनामे में फॉर्म 6 में कोई बदलाव न करने की बात कही है, लेकिन यह भी सच है कि फॉर्म 6 के साथ एक और घोषणापत्र के जरिए अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी।

अश्विनी कुमार के मुताबिक, अब सुप्रीम कोर्ट को इस बात पर विचार करना होगा कि अतिरिक्त जानकारी की मांग को फॉर्म 6 में बदलाव माना जा सकता है या नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानूनी पहलू पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए।