खरगे के बयान पर मचे सियासी घमासान के बीच मायावती की नसीहत- ‘व्यक्तिगत और हिंसक हो रही राजनीति’

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए गए विवादित बयान के बाद देश का सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इसी घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बिना नाम लिए कांग्रेस और शीर्ष नेताओं को सख्त नसीहत दी है। उन्होंने भारतीय राजनीति में गिरते संवाद के स्तर और व्यक्तिगत छींटाकशी पर गहरी चिंता जाहिर की है।

‘व्यक्तिगत और हिंसक हो रही है बयानबाजी’

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर लिखा कि भारतीय राजनीति में आपसी अविश्वास, द्वेष और आरोप-प्रत्यारोप का स्तर लगातार गिर रहा है। उनके मुताबिक, अब यह व्यक्तिगत स्तर पर काफी बेलगाम होकर असंसदीय, अमर्यादित और संकीर्ण हो चुका है। बसपा चीफ ने इसे जातिवाद से ग्रसित और हिंसक बयानबाजी तक पहुंचने को देश की गरिमा व मान-मर्यादा के लिए अति-दुखद बताया है।

शीर्ष नेताओं को ‘विषैली राजनीति’ से बचने की सलाह

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में बड़े नेताओं को भी सीधे तौर पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शीर्ष स्तर पर बैठे लोगों को एक-दूसरे के प्रति समुचित सम्मान दिखाना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं कर सकते, तो कम से कम आपत्तिजनक और विषैली राजनीति को किसी भी प्रकार से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। मायावती का कहना है कि इस तरह की स्वार्थी और गरीब-विरोधी राजनीति के कारण राजनीतिक व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा, जो देशहित में नहीं है।

‘अहंकार की लड़ाई छोड़ महंगाई-बेरोजगारी पर हो बात’

बसपा सुप्रीमो ने नेताओं के बीच चल रही मौजूदा बयानबाजी को ‘नाक की लड़ाई’ करार दिया। उन्होंने लिखा कि सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों से जनता में पहले ही काफी बेचैनी है। ऐसे में नेताओं की यह आपसी लड़ाई स्थिति को और विषम बना रही है।

उन्होंने राजनीतिक दलों को याद दिलाया कि देश की जनता बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसी ज्वलंत समस्याओं का समाधान चाहती है। मायावती ने सभी पार्टियों को आगाह किया है कि अशोभनीय टीका-टिप्पणी की यह होड़ राजनीतिक माहौल को और कड़वा बनाएगी, इसलिए सभी नेताओं को वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।