UP Election 2027: इटावा जिले की 3 सीटों का समीकरण, जसवंतनगर और सदर में दिलचस्प मुकाबला
समाजवादी पार्टी (SP) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक विरासत और सैफई से सीधा जुड़ाव रखने वाले इटावा (Etawah) जिले पर 2027 के विधानसभा चुनाव में भी सबकी नजरें टिकी हैं। सपा का गढ़ माने जाने वाले इस जिले में 2017 और 2022 के चुनाव नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सपा के बीच कड़े मुकाबले की अलग-अलग तस्वीरें पेश की हैं।
इटावा जिले में मुख्य रूप से तीन विधानसभा सीटें आती हैं- जसवंतनगर, इटावा सदर और भरथना (SC)। 2017 में जहां बीजेपी ने जिले की तीनों सीटों पर क्लीन स्वीप किया था, वहीं 2022 में सपा ने वापसी करते हुए जसवंतनगर और भरथना पर कब्जा जमाया। जबकि बीजेपी इटावा सदर की सीट बचाने में कामयाब रही। आगामी 2027 के चुनाव में इन तीनों सीटों पर स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों के चयन और जातीय समीकरणों की अहम भूमिका होगी।
1. जसवंतनगर: शिवपाल यादव का मजबूत किला
जसवंतनगर विधानसभा सीट सैफई और यादव परिवार के सीधे प्रभाव वाली सीट है। यहां से सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव लगातार जीतते रहे हैं। 2022 के चुनाव में शिवपाल यादव ने बीजेपी प्रत्याशी को 90,979 वोटों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी थी। 2027 के लिए बीजेपी के सामने यहां सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को मजबूत कर मतदाताओं तक पहुंच बनाना होगी। वहीं, सपा को अपना यह शानदार प्रदर्शन दोहराने के लिए विकास, सड़क, रोजगार और किसानों के मुद्दों पर जनता से संपर्क साधे रखना होगा।
2. इटावा सदर: सपा और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर
इटावा सदर सीट 2027 में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली है। 2022 में यहां बीजेपी की सरिता भदौरिया ने 98,150 वोट पाकर जीत दर्ज की थी, लेकिन सपा के सर्वेश कुमार शाक्य (94,166 वोट) से उनकी जीत का अंतर महज 3,984 वोटों का था। इस करीबी मुकाबले ने साफ कर दिया कि सदर सीट पर दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर है। इसके अलावा 2022 में बहुजन समाज पार्टी (BSP) के कुलदीप गुप्ता को मिले 46,525 वोटों ने इस सीट पर तीसरे कोण (Triangular contest) की मौजूदगी का भी अहसास कराया था।
3. भरथना (सुरक्षित): सपा की जीत बरकरार रखने की चुनौती
अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित भरथना सीट पर 2022 में सपा के राघवेंद्र कुमार सिंह ने जीत हासिल की थी। उन्होंने बीजेपी के डॉ. सिद्धार्थ शंकर दोहरे को 7,559 वोटों के अंतर से हराया था। 2027 में इस सीट पर स्थानीय जनसंपर्क और उम्मीदवार की सामाजिक स्वीकार्यता निर्णायक होगी। बीजेपी को जहां अपनी हार के कारणों को समझकर नई रणनीति बनानी होगी, वहीं सपा के सामने अपनी इस जीत को कायम रखने की चुनौती होगी। 2022 में बीएसपी की कमलेश अंबेडकर को मिले 37,599 वोट यहां भी मायावती की पार्टी के प्रभाव को दर्शाते हैं।
जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दे
इटावा की राजनीति में यादव समुदाय के साथ-साथ शाक्य, लोध, और अनुसूचित जाति के मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है। हालांकि, 2027 के चुनाव में केवल जातीय समीकरण ही हावी नहीं रहेंगे। रोजगार, कानून-व्यवस्था, कृषि की समस्याएं, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें भी मतदाताओं की प्राथमिकताओं में शामिल होंगी।
