इजरायल चुनाव: 38 साल बाद फुल टर्म इलेक्शन, नेतन्याहू को कड़ी टक्कर

Benjamin Netanyahu

इजरायल में 1988 के बाद 38 साल में पहली बार संसद (नेसेट) अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर चुनाव में जा रही है। कल होने वाले मतदान में मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता बचाने की जद्दोजहद में हैं। उनके सामने इस बार कई कद्दावर नेता मैदान में हैं, जिनका पलड़ा भारी बताया जा रहा है।

अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हुए हमास के हमले और उसके बाद गाजा के हालात को लेकर नेतन्याहू को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, ईरान, लेबनान, सीरिया और यमन के साथ चल रहे युद्ध के कारण भी वह विरोधियों के सीधे निशाने पर हैं। मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालात के मद्देनजर ये चुनाव इजरायल के भविष्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।

नेसेट का गणित: सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत

इजरायल की 25वीं नेसेट (संसद) ने अपना 4 साल का टर्म पूरा कर लिया है। नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 61 है। इजरायल में प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (Proportional Representation) वोटिंग सिस्टम से चुनाव होते हैं, जिसके कारण किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल होता है और सरकारें हमेशा गठबंधन से ही बनती हैं। सत्ता में वापसी के लिए नेतन्याहू को हर हाल में अपने सहयोगी दलों को साधे रखना होगा।

गादी आइजेनकोट: चुनाव में सबसे बड़े चैलेंजर

नेतन्याहू के खिलाफ सबसे मजबूत चेहरे के तौर पर इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के पूर्व प्रमुख गादी आइजेनकोट उभर कर सामने आए हैं। सैन्य पृष्ठभूमि वाले आइजेनकोट ने पिछले साल ही ‘याशर पार्टी’ का गठन किया है और वह इसके चेयरमैन हैं।

आइजेनकोट युद्ध कैबिनेट का हिस्सा थे, लेकिन साल 2024 में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। गाजा युद्ध के दौरान सैनिक के तौर पर तैनात उनके बेटे की मौत हो गई थी। एक नए राजनीतिक चेहरे और मजबूत मिलिट्री क्रेडेंशियल्स के कारण वह नेतन्याहू को चुनाव में सबसे कड़ी टक्कर दे रहे हैं।

नफ्ताली बेनेट और फार-राइट की राजनीति

प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट का नाम भी शामिल है। हाई-टेक एंटरप्रेन्योर से नेता बने बेनेट 2021-22 में इजरायल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उनकी छवि एक फार-राइट (Far-right) नेता की है, जो धार्मिक राजनीतिक विचारधारा और बस्तियों के निर्माण के पक्षधर हैं।

बेनेट ने साल 2021 में एक ‘यूनिटी गवर्नमेंट’ बनाई थी, जिसमें लेफ्ट, राइट-विंग और फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टियां शामिल थीं। हालांकि, राइट-विंग सदस्यों के हटने से यह गठबंधन एक साल में ही गिर गया था। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करने के लिए नफ्ताली बेनेट, एविगडोर लिबरमैन और गादी आइजेनकोट एक साथ आ सकते हैं।

येर गोलान: वामपंथी खेमे का बड़ा सैन्य चेहरा

इस चुनावी रण में एक और पूर्व जनरल येर गोलान भी मैदान में हैं। वह ‘डेमोक्रेट्स पार्टी’ के चेयरमैन हैं, जिसका गठन दो पुरानी लेफ्ट-विंग पार्टियों—लेबर और मेरेट्ज को मिलाकर किया गया है।

आईडीएफ में 40 साल तक सेवाएं देने वाले गोलान ने पैराट्रूपर्स ब्रिगेड, नाहल ब्रिगेड और नॉर्दर्न कमांड की कमान संभाली थी और वह डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ भी रहे हैं। साल 2019 में पूर्व प्रधानमंत्री एहुद बराक के गठबंधन से राजनीति में कदम रखने वाले गोलान बाद में मेरेट्ज पार्टी से सांसद बने। वह बेनेट-लैपिड सरकार में डिप्टी इकोनॉमी मिनिस्टर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।