Navi Pillay Nobel Prize: नवी पिल्लई को बधाई न देने पर शशि थरूर का सरकार पर हमला

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भारतीय मूल की प्रख्यात न्यायविद और संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नवानेथम (नवी) पिल्लई को इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार मिला है। इस बड़ी उपलब्धि पर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बधाई संदेश जारी नहीं किया गया है। इसे लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर कड़ा निशाना साधा है।

थरूर ने साझा किया AI वीडियो, सरकार पर साधा निशाना

थरूर ने सोशल मीडिया पर नवी पिल्लई के जीवन पर आधारित एक एआई (AI) वीडियो साझा करते हुए सरकार के रुख की तीखी आलोचना की।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “भारतीय मूल की इस असाधारण महिला को नोबेल शांति पुरस्कार जीते हुए छह दिन हो चुके हैं और भारत सरकार- जो उनका पैतृक देश है, उसने उन्हें बधाई तक नहीं दी?!” सरकार के इस रवैये को आड़े हाथों लेते हुए थरूर ने आगे लिखा कि ऐसे घटिया लोगों पर शर्म आती है, जिन्होंने इतना निंदनीय फैसला लिया है।

डी राजा ने पीएम से किया आग्रह

सरकार की चुप्पी पर केवल कांग्रेस ही नहीं, वामपंथी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। सीपीआई के महासचिव डी राजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नवी पिल्लई को आधिकारिक तौर पर बधाई देने का आग्रह किया है। एक मीडिया चैनल से बातचीत में डी राजा ने कहा कि इस उपलब्धि का पूरे देश को जश्न मनाना चाहिए।

थरूर पहले ही दे चुके हैं बधाई श

शि थरूर ने पुरस्कार की घोषणा के बाद ही नवी पिल्लई को बधाई दी थी। उन्होंने उनकी तस्वीर साझा करते हुए मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय न्याय और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए उनके जीवन भर के समर्पण की सराहना की थी।

संयुक्त राष्ट्र में काम कर चुके थरूर ने अपने संदेश में कहा था कि उनका यह सम्मान उन सभी लोगों को प्रेरित करता है जिन्होंने यूएन में अपनी सेवाएं दी हैं और यह पुरस्कार वास्तव में उनके लिए बिल्कुल सही है।

बस ड्राइवर की बेटी से नोबेल तक का सफर

नवानेथम पिल्लई का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के नटाल प्रांत स्थित डरबन शहर में हुआ था। भारतीय तमिल मूल से ताल्लुक रखने वाली नवी एक गरीब और बेहद साधारण परिवार से आती हैं। उनके पिता एक बस ड्राइवर थे। नवी पिल्लई का शुरुआती जीवन दक्षिण अफ्रीका के क्रूर और दमनकारी रंगभेद शासन के साये में बीता।