2 करोड़ से ज्यादा नाम कैसे कम हुए? जानिए क्या है 16.18 लाख फॉर्म का नया विवाद और चुनाव आयोग का पूरा गणित
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही मतदाता सूची (Voter List) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बाद राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है। शुरुआती और अंतिम सूची के आंकड़ों में लगभग 2.04 करोड़ मतदाताओं की शुद्ध कमी देखी गई है, जिसे लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसके साथ ही, हाल ही में 16.18 लाख आवेदनों और बिना कारण के विलोपन (Delete) वाले 85,854 फॉर्मों से जुड़ी एक खोजी रिपोर्ट ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
2.89 करोड़ नामों को हटाने का मामला क्या था?
यूपी में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण 27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था। जनवरी 2026 में जब प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित हुई, तो यह बात सामने आई कि पुरानी सूची की तुलना में लगभग 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम बाहर हो गए हैं।
उस समय के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक:
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लगभग 1.26 करोड़ मतदाता स्थानांतरित (Shifted) माने गए।
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46 लाख को मृत (Dead) बताया गया।
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23.70 लाख को दोहरी प्रविष्टि (Duplicate) माना गया।
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83.73 लाख मतदाता अनुपस्थित (Absent) मिले।
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9.57 लाख को अन्य श्रेणियों में रखा गया।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह शुरुआती गणना थी। किसी व्यक्ति का घर पर न मिलना (अनुपस्थित) यह साबित नहीं करता कि वह अपात्र है। चुनाव आयोग ने इसके बाद दावों और आपत्तियों के लिए 6 मार्च 2026 तक का समय दिया था।
वास्तव में कितने वोटर घटे और कितने बढ़े?
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा द्वारा 10 अप्रैल 2026 को जारी अंतिम सूची से स्थिति कुछ स्पष्ट हुई।
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SIR से पहले कुल मतदाता: 15,44,30,092
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6 जनवरी की प्रारंभिक सूची में मतदाता: 12,55,56,025
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10 अप्रैल 2026 की अंतिम सूची में मतदाता: 13,39,84,792
इन आंकड़ों के अनुसार, प्रारंभिक सूची और अंतिम सूची के बीच 84,28,767 मतदाताओं की शुद्ध बढ़ोतरी हुई। लेकिन, अगर SIR शुरू होने से पहले की सूची से तुलना करें, तो अंतिम मतदाता संख्या में अभी भी लगभग 2.04 करोड़ (करीब 13.24%) की शुद्ध कमी दर्ज की गई।
16.18 लाख फॉर्म और 85,854 विलोपन फॉर्म का नया विवाद
अक्टूबर 2026 में ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की एक खोजी रिपोर्ट ने मामले को गरमा दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदन (नए नाम जोड़ने के लिए) प्रारंभिक सूची प्रकाशित होने से पहले ही प्राप्त हो गए थे, जिनका सार्वजनिक विवरण मेल नहीं खा रहा है। इसके अलावा, एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया गया कि 85,854 ऐसे फॉर्म थे जिनसे नाम हटाए गए, लेकिन उनमें नाम हटाने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था।
चुनाव आयोग का पक्ष क्या है?
इन आरोपों पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 7 अक्टूबर को खंडन जारी किया। आयोग का कहना है:
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16.18 लाख फॉर्म-6 घर-घर गणना के दौरान बीएलओ (BLO) द्वारा प्राप्त किए गए थे। आवेदन मिलने का मतलब सीधा नाम जुड़ना नहीं है, बल्कि जांच के बाद ही फैसला होता है।
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मतदाता सूची से मृत, शिफ्टेड और डुप्लीकेट वोटरों को हटाना चुनाव की निष्पक्षता के लिए जरूरी है।
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इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के करीब 5.82 लाख बूथ लेवल एजेंटों (BLA) ने हिस्सा लिया था। किसी भी मतदाता का नाम कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना नहीं हटाया गया।
क्या 2027 से पहले बदल सकती है सूची?
हां, चुनाव आयोग ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले फिर से संक्षिप्त पुनरीक्षण का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। 12 नवंबर 2026 को नई प्रारंभिक सूची आएगी और 4 जनवरी 2027 को अंतिम सूची का प्रकाशन होगा। इस दौरान जो पात्र नागरिक किसी कारण से छूट गए थे, वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपील कर सकते हैं और फॉर्म-6 के जरिए अपना नाम दोबारा सूची में जुड़वा सकते हैं।
