सऊदी अरब में टली श्रीलंकाई युवक की मौत की सजा: फेसबुक कमेंट पर हुई थी गिरफ्तारी

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सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े फैसले के तहत श्रीलंकाई प्रवासी मजदूर शिवरासा अनोझन को सुनाई गई मौत की सजा को पलट दिया है। 24 वर्षीय श्रीलंकाई हिंदू प्रवासी मजदूर अनोझन को पैगंबर मोहम्मद के बारे में फेसबुक पर की गई एक टिप्पणी के कारण ईशनिंदा (Blasphemy) का दोषी ठहराया गया था। श्रीलंका सरकार की ओर से लगातार की गई कूटनीतिक और कानूनी पैरवी के बाद यह राहत मिली है। श्रीलंका के विदेश मामलों, विदेशी रोजगार और पर्यटन मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2026 को इस बात की पुष्टि की कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को मौत की सजा को रद्द कर दिया है।

फेसबुक कमेंट से मौत की सजा तक का सफर

यह पूरा विवाद जून 2026 के आखिर में श्रीलंका में एक हिंदू तीर्थयात्रा के दौरान सामने आए एक वीडियो से शुरू हुआ था। वायरल हुए उस वीडियो में एक युवा मुस्लिम शख्स हिंदू तीर्थयात्रियों के पास एक कुत्ते को लात मारता हुआ नजर आ रहा था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई थी।

बहस के दौरान कथित तौर पर एक यूजर ने हिंदू देवता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की, जिसके जवाब में अनोझन ने तमिल भाषा में पैगंबर मोहम्मद के बारे में एक कमेंट लिख दिया। हालांकि, विवाद बढ़ने पर अनोझन ने वह कमेंट डिलीट कर दिया था और माफी मांगते हुए एक वीडियो भी जारी किया था।

लेकिन उस विवादित कमेंट का स्क्रीनशॉट सऊदी अरब में उनके एम्प्लॉयर तक पहुंच गया, जिसके बाद वहां की पुलिस ने जांच शुरू कर दी और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर लिए गए। अल-अहसा क्रिमिनल कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई के बाद 15 जुलाई को उन्हें पांच साल की जेल और 30 लाख सऊदी रियाल (लगभग 8 लाख डॉलर) का जुर्माना लगाया था। इसके बाद 17 सितंबर को अपील कोर्ट ने उस सजा को पलटते हुए मौत की सजा सुना दी थी।

श्रीलंका की तेज कूटनीतिक कोशिशें

मौत की सजा सुनाए जाने के बाद श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और विदेश मंत्रालय ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए। सुप्रीम कोर्ट में अपील की पैरवी करने के लिए रियाद में एक स्पेशल लीगल टीम भेजी गई। इसके अलावा, श्रीलंका के कई सांसदों, बौद्ध धार्मिक नेताओं और हिंदू प्रतिनिधियों ने भी दया की अपील करते हुए सरकार से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई थी। श्रीलंका के राजदूत ने खुद जेल जाकर अनोझन से मुलाकात की थी और उनकी स्थिति का जायजा लिया था।

कानूनी स्थिति पर अभी भी अनिश्चितता

सऊदी सुप्रीम कोर्ट द्वारा मौत की सजा को पलटे जाने के बाद अनोझन को बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी कानूनी स्थिति को लेकर अभी भी पूरी तरह से स्पष्टता नहीं है। यह अभी साफ नहीं हो सका है कि उन्हें पहले सुनाई गई पांच साल की जेल की सजा काटनी होगी या फिर दोषी ठहराने का फैसला पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। इस मामले में सऊदी अधिकारियों की तरफ से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।