मायावती ने BSP को 3 सेक्टरों में बांटा, यूपी और उत्तराखंड की कमान खुद संभाली

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संगठन स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। चुनावी तैयारियों को धार देने और संगठन विस्तार के उद्देश्य से मायावती ने पूरी पार्टी के सांगठनिक ढांचे को तीन सेक्टरों (Three Sectors) में विभाजित कर दिया है।

इस नए ढांचे के तहत अलग-अलग सेक्टरों के लिए वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं, जबकि सबसे अहम सेक्टर यानी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की कमान मायावती ने सीधे अपने हाथों में रखी है।

3 सेक्टरों में बंटा राष्ट्रीय संगठन

बसपा के नए पुनर्गठन का मकसद राज्यों में पार्टी गतिविधियों को तेज करना और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच सीधा समन्वय स्थापित करना है। इसके लिए देश के प्रमुख राज्यों को तीन अलग-अलग जोन में बांटकर प्रभारियों की नियुक्ति की गई है।

सेक्टर 1 और 2: इन नेताओं को मिली 19 राज्यों की कमान

  • सेक्टर 1 (10 राज्य): बसपा के सेक्टर 1 के अंतर्गत कुल 10 राज्यों को शामिल किया गया है। इस सेक्टर की सांगठनिक देखरेख की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामजी गौतम और सुरेश राव को सौंपी गई है। ये दोनों नेता इन 10 राज्यों में संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति का जिम्मा संभालेंगे।

  • सेक्टर 2 (9 राज्य): सेक्टर 2 में कुल 9 राज्यों को रखा गया है। इस सेक्टर की कमान राजाराम और अतरसिंह यादव को दी गई है। इन दोनों नेताओं को संबंधित राज्यों में बसपा की इकाइयों को सक्रिय करने और जनाधार बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।

यूपी और उत्तराखंड सीधे मायावती के नियंत्रण में

बसपा के नए संगठनात्मक ढांचे में सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर 3 है। इस सेक्टर में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को रखा गया है।

2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से उत्तर प्रदेश पार्टी की प्राथमिक राजनीतिक जमीन है, लिहाजा इस पूरे सेक्टर की निगरानी सीधे मायावती खुद करेंगी। इसके साथ ही, बसपा का लखनऊ स्थित केंद्रीय कार्यालय सेक्टर 3 से जुड़े सभी सांगठनिक कामकाज, बैठकों और रणनीतिक फैसलों का मुख्य संचालन केंद्र रहेगा।

2027 की चुनावी रणनीति की शुरुआत

विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को सेक्टरवार बांटने के इस कदम को बसपा की सक्रिय चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को देकर मायावती ने अपना पूरा फोकस उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीतिक जमीन को दोबारा मजबूत करने पर केंद्रित कर लिया है।