September 20, 2026

‘मक्का रक्षा समझौता सिर्फ दिखावा, मकसद सऊदी से पैसे ऐंठना’: पूर्व अमेरिकी NSA मैकमास्टर ने पाकिस्तान और तुर्किये पर दागे तीखे सवाल

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पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे पर सुरक्षा खतरों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) लेफ्टिनेंट जनरल एच.आर. मैकमास्टर ने एक बड़ा बयान दिया है। मैकमास्टर ने सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए ऐतिहासिक ‘मक्का रक्षा समझौते’ (Mecca Joint Defense Agreement) में पाकिस्तान और तुर्किये की वास्तविक भूमिका और मंशा पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने पाकिस्तान की क्षमता और तुर्किये की सरकार की नीतियों को लेकर तीखी आलोचनात्मक राय रखी है।

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने मक्का में इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे:

  • सामूहिक सुरक्षा (Mutual Defense): समझौते का मुख्य प्रावधान यह है कि तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में, उसे तीनों पर किया गया हमला माना जाएगा। तुर्किये ने इसे नाटो (NATO) के आर्टिकल 5 जैसी सामूहिक रक्षा व्यवस्था के तकनीकी रूप से समकक्ष बताया था।

  • सैन्य समन्वय: इसके तहत तीनों देशों के रक्षा मंत्रियों, विदेश मंत्रियों और सैन्य प्रमुखों के बीच नियमित समन्वय तंत्र स्थापित करने, संयुक्त सैन्य अभ्यास, एयर डिफेंस, ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों (UAVs) में सहयोग तथा रक्षा तकनीकों के संयुक्त विकास की रूपरेखा तैयार की गई है।

पाकिस्तान पर मैकमास्टर का प्रहार: ‘सिर्फ पैसे पाने का जरिया’

मैकमास्टर ने पाकिस्तान के इरादों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अब यह देखना होगा कि इस्लामाबाद समझौते की शर्तों को जमीनी स्तर पर लागू भी करता है या नहीं।

  • दोहरी नीति का आरोप: उनके मुताबिक, पाकिस्तान की विदेश और सुरक्षा नीतियों में हमेशा एक साथ अलग-अलग दिशाओं में काम करने (दोगलेपन) का रिकॉर्ड रहा है।

  • आर्थिक लाभ का मकसद: मैकमास्टर ने दावा किया कि पाकिस्तान के लिए यह मक्का समझौता काफी हद तक ‘दिखावटी’ हो सकता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सऊदी अरब से मिलने वाली आर्थिक मदद और वित्तीय पैकेज के प्रवाह को लगातार बनाए रखना है।

हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने समझौते के समय इसे क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और तीनों देशों के बीच ऐतिहासिक रक्षा संबंधों को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम करार दिया था।

तुर्किये की नीतियों और एर्दोगन सरकार पर भी निशाना

मैकमास्टर ने तुर्किये की भूमिका को लेकर भी गंभीर चिंताएं जाहिर कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी तुर्किये के नागरिकों के खिलाफ नहीं, बल्कि राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन और उनकी सत्तारूढ़ पार्टी AKP की नीतियों को लेकर है:

  • कट्टरपंथी संगठनों को समर्थन: उन्होंने आरोप लगाया कि तुर्किये की सरकार कतर से मिलने वाले वित्तीय सहयोग के जरिए मुस्लिम ब्रदरहुड और अन्य विवादास्पद संगठनों को बढ़ावा देती रही है।

  • वैचारिक चिंताएं: मैकमास्टर के अनुसार, ये संगठन नफरत और उग्रवादी विचारधारा को खाद-पानी देते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है।

सऊदी अरब के रक्षा बुनियादी ढांचे पर हालिया खतरों के बीच इस त्रिपक्षीय गठबंधन पर एक शीर्ष पूर्व अमेरिकी सुरक्षा अधिकारी द्वारा उठाए गए इन सवालों ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है।