2027 के रण की तैयारी में जुटी BJP, अखिलेश के PDA की काट और काम पर फोकस
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना चुनावी खाका खींचना शुरू कर दिया है। पिछले करीब एक दशक के शासन के बाद पार्टी इस बार सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए अपनी सरकार के कामकाज और उपलब्धियों को मुख्य चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में है। कानून-व्यवस्था में सुधार, महिला सुरक्षा और विकास कार्यों को पार्टी अपने चुनाव प्रचार अभियान का प्रमुख आधार बनाएगी।
एक्सप्रेसवे, ODOP और युवा रोजगार पर रहेगा जोर
चुनावी अभियान में योगी सरकार के दौरान हुए बुनियादी ढांचे के विकास को प्रमुखता से पेश किया जाएगा। पार्टी ने राज्य भर में बने एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के परिणामों को जनता के बीच ले जाने की रूपरेखा तैयार की है।
इसके साथ ही युवाओं और रोजगार के मोर्चे पर सरकार ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के तहत किए गए प्रयासों और उपलब्धियों को भी चुनावी मंचों से भुनाने की योजना पर काम कर रही है।
‘माफिया राज’ का खात्मा और 18 घंटे बिजली की आपूर्ति
बीजेपी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह के मुताबिक, पार्टी का मुख्य जोर यह स्थापित करने पर रहेगा कि पिछले वर्षों में शासन और प्रशासनिक स्तर पर जमीन पर क्या बदलाव आए हैं। इसके तहत सभी जिलों में 18 घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के दावे और राज्य से ‘माफिया राज’ खत्म करने के लिए की गई सख्त कार्रवाइयों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाएगा।
प्रवक्ता ने कहा कि आगामी चुनाव में भी पार्टी ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी और केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी वर्गों तक पहुंचाने के ट्रैक रिकॉर्ड को सामने रखेगी।
लखनऊ में शीर्ष संगठन का मंथन, PDA की काट पर नजर
रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए संगठन के शीर्ष नेता लगातार लखनऊ में बैठकें कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष और उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की है। इन बैठकों में न केवल संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा की गई, बल्कि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समीकरण का मुकाबला करने के उपायों पर भी विस्तृत मंथन हुआ।
2024 के लोकसभा चुनाव में जिन सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था, उनकी समीक्षा के आधार पर पार्टी अपने राजनीतिक एजेंडे के साथ-साथ सामाजिक आधार के विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
