जानिए क्यों लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष बने अखिलेश यादव, शिवपाल से ली कमान
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अब डॉ. राममनोहर लोहिया ट्रस्ट के भी अध्यक्ष बन गए हैं। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता और अपने चाचा शिवपाल सिंह यादव की जगह इस पद की जिम्मेदारी संभाली है। शिवपाल करीब एक दशक से इस ट्रस्ट के अध्यक्ष थे। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस बड़े संगठनात्मक बदलाव ने सियासी हलकों में समाजवादी परिवार के आंतरिक समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।
ट्रस्ट की हालिया बैठक में अखिलेश यादव को कमान सौंपने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में ट्रस्ट के सभी आठ सदस्य शामिल थे, जिन्होंने सर्वसम्मति से अखिलेश को अध्यक्ष चुना। अहम बात यह रही कि इस बैठक में शिवपाल यादव भी मौजूद थे और उन्होंने स्वयं इस फैसले पर अपनी सहमति जताई।
शिवपाल की सहमति से हुआ बदलाव, नहीं दिखा 2017 जैसा टकराव
लोहिया ट्रस्ट के नेतृत्व में हुए इस फेरबदल में 2017 जैसे खुले टकराव की स्थिति नहीं दिखी। शिवपाल यादव की सहमति और ट्रस्ट की बैठक में उनकी मौजूदगी यह साफ करती है कि परिवार और पार्टी के भीतर एक व्यावहारिक समझौता हो चुका है। चुनाव से पहले किसी भी तरह की दरार का संदेश बाहर जाने से रोकने के लिए सर्वसम्मति से यह बदलाव किया गया है। शिवपाल लगातार पार्टी में बने हुए हैं और वरिष्ठ नेता की भूमिका निभा रहे हैं।
वैचारिक विरासत और संस्थाओं पर अखिलेश का पूर्ण नियंत्रण
इस बदलाव के साथ ही अखिलेश यादव ने पार्टी के वैचारिक और संगठनात्मक प्रतीकों पर अपनी पकड़ पूरी तरह से मजबूत कर ली है। जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट की कमान अखिलेश के पास पहले से ही थी। अब लोहिया ट्रस्ट भी उनके हाथ में आने से समाजवादी विरासत से जुड़े दोनों प्रमुख ट्रस्ट उनके नियंत्रण में आ गए हैं। इसे अखिलेश द्वारा मुलायम सिंह यादव की विरासत के इकलौते उत्तराधिकारी के रूप में अपनी वैचारिक वैधता को और मजबूत करने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
2027 चुनाव के लिए एकसूत्रीय नियंत्रण की रणनीति
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह कदम अखिलेश यादव की 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों का हिस्सा है। चुनाव के समय संसाधन, विचारधारा का प्रचार और पार्टी से जुड़ी संस्थाओं का आंतरिक समन्वय एक हाथ में होने से चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारना आसान हो जाता है। ट्रस्ट की कमान लेकर अखिलेश ने यह भी संदेश दिया है कि पार्टी के भीतर अब कोई समानांतर या वैकल्पिक शक्ति केंद्र नहीं है।
2017 के विवाद में मुलायम ने सौंपी थी शिवपाल को कमान
लोहिया ट्रस्ट की स्थापना समाजवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार और पार्टी से जुड़े वैचारिक कार्यों के लिए की गई थी। साल 2017 में जब समाजवादी परिवार के अंदर नेतृत्व को लेकर तीखा संघर्ष चल रहा था, तब तत्कालीन सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने एक बड़ा फैसला लिया था। उस समय मुलायम सिंह ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को हटाकर शिवपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी सौंपी थी। करीब नौ-दस साल तक शिवपाल ने इस संस्था का संचालन किया, जिसके बाद अब यह कमान अखिलेश यादव के पास लौट आई है।
