कर्नाटक वोटर लिस्ट का पेंच: नंदन नीलेकणि और निखिल कामथ के नाम ‘डिस्क्रेपेंसी लिस्ट’ में
कर्नाटक में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान में एक बड़ी तकनीकी खामी सामने आई है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि और जेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ समेत राज्य की कई नामी-गिरामी हस्तियों के नाम चुनाव आयोग की ‘डिस्क्रेपेंसी लिस्ट’ (Discrepancy List) में आ गए हैं। इन सभी के नाम 2002 के पुराने चुनावी रिकॉर्ड से मैच नहीं हो पाए हैं, जिसके चलते इनके लिए नोटिस जेनरेट किए गए हैं।
2002 के रिकॉर्ड से नहीं हुआ मिलान
चुनाव अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे या जिनका पुराना डेटा मैप नहीं हो पाया है, उन्हें ‘Unmapped with last SIR’ कैटेगिरी में रखा गया है। अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम सुरक्षित रखने के लिए ऐसे मतदाताओं को चुनाव आयोग (ECI) द्वारा स्वीकृत 11 दस्तावेजों में से कोई एक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास जमा करना होगा। यह नोटिस प्रक्रिया 22 अक्टूबर तक चलेगी और 27 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
नीलेकणि के पूरे परिवार का नाम लिस्ट में
सामने आई सूची के मुताबिक, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष रहे नंदन नीलेकणि (71), उनकी पत्नी रोहिणी नीलेकणि (67) और उनके बच्चे जान्हवी (38) तथा निहार (36) के नाम भी इस लिस्ट में शामिल हैं। बी.टी.एम. लेआउट विधानसभा क्षेत्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज नीलेकणि परिवार को दस्तावेज सत्यापन के लिए नोटिस दिए जाने की संभावना है। बता दें कि नंदन नीलेकणि ने 2014 का लोकसभा चुनाव भी बेंगलुरु दक्षिण सीट से लड़ा था।
सीएनआर राव और हरेकला हजब्बा का नाम भी फ्लैग
नीलेकणि और कामथ के अलावा, भारत रत्न से सम्मानित प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर सीएनआर राव और पद्मश्री से सम्मानित हरेकला हजब्बा का नाम भी इसी सूची में शामिल है। हालांकि, बेंगलुरु अर्बन के जिला निर्वाचन अधिकारी महेश्वर राव ने स्पष्ट किया है कि सीएनआर राव को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है, क्योंकि बीएलओ ने उनका नाम अंतिम सूची में शामिल रखने की सिफारिश कर दी है। वहीं, नाम में अंतर के चलते हरेकला हजब्बा को नोटिस जारी किया गया है।
43.81 लाख मतदाताओं के लिए जेनरेट हुए नोटिस
यह गड़बड़ी केवल चंद हस्तियों तक सीमित नहीं है। राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल कुल 4.46 करोड़ मतदाताओं में से करीब 43.81 लाख (लगभग 10 प्रतिशत) मतदाताओं के लिए इसी तरह के नोटिस जेनरेट किए गए हैं। अब इन सभी को तय समय सीमा के भीतर अपने प्रासंगिक दस्तावेज जमा करने होंगे ताकि उनका नाम वोटर लिस्ट से न कटे।
