September 15, 2026

‘संघ का आधार नफरत नहीं, सात्विक प्रेम है’: लंदन में RSS प्रमुख मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि संघ के कामकाज का आधार नफरत नहीं, बल्कि ‘शुद्ध और सात्विक प्रेम’ है। लंदन में आयोजित ‘एकात्मता का उत्सव’ (Celebration of Oneness) कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदू विचारधारा, समाज में अपनत्व और विविधता में एकता के मुद्दे पर अपनी बात रखी।

भागवत का यह संबोधन संघ के शताब्दी वर्ष (100 साल) के मौके पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान का हिस्सा है। वे अमेरिका के न्यूयॉर्क और कनाडा के टोरंटो का दौरा पूरा करने के बाद ब्रिटेन पहुंचे हैं।

‘शुद्ध सात्विक प्रेम हमारे काम का आधार’ संवाद कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने संगठन की कार्यशैली को लेकर बनी धारणाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों का मानना है कि RSS के काम का आधार तीव्र नफरत है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। संघ के एक गीत का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शुद्ध सात्विक प्रेम ही उनके काम का मूल आधार है। भागवत ने दावा किया कि 100 साल बाद भी स्वयंसेवकों के व्यवहार और संघ के माहौल में यही भावना मौजूद है।

विविधता में एकता और हिंदू दर्शन अपने संबोधन में भागवत ने हिंदू चिंतन में ‘अपनापन’ और एकता को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, एकता का अर्थ यह नहीं है कि समाज में सभी लोग एक जैसे हो जाएं। अलग-अलग मान्यताओं और परंपराओं के बावजूद आपसी सम्मान और सहयोग कायम रखा जा सकता है। उन्होंने हिंदू दर्शन को महज एक पूजा-पद्धति न मानते हुए इसे समाज और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने वाली एक व्यापक जीवन-दृष्टि करार दिया।

आधुनिक दुनिया के लिए नया मॉडल सरसंघचालक ने कहा कि संघ और हिंदू सभ्यता की परंपरा ने अतीत में इन विचारों को व्यावहारिक जीवन में उतारकर दुनिया को दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा हालात में दुनिया को एक नया मॉडल और आधुनिक समाधान देने की जरूरत है, क्योंकि इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है।

शताब्दी वर्ष में तीन देशों का संपर्क अभियान लंदन में 6 सितंबर को आयोजित यह कार्यक्रम हिंदू स्वयंसेवक संघ यूके (HSS UK) और संस्था ‘इंटीग्रल’ (Integral) के सहयोग से किया गया। HSS UK ब्रिटेन में 1966 से सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय है। आयोजकों के अनुसार, इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न समुदायों को एक मंच पर लाना था, जिसमें ब्रिटेन के 310 से अधिक सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया। अमेरिका और कनाडा के बाद मोहन भागवत के विदेशी संपर्क अभियान का समापन लंदन के इसी आयोजन के साथ हो रहा है।