September 15, 2026

चीनी सेना की चेतावनी: शहरों पर हो सकता है परमाणु हमला, जापान से बताया बड़ा खतरा

china

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की एक मेडिकल टीम ने अपनी नई स्टडी में चेतावनी दी है कि चीनी शहरों को संभावित परमाणु हमले के लिए तैयार रहना चाहिए। शोधकर्ताओं ने इस रिपोर्ट में विशेष रूप से जापान का जिक्र करते हुए उस पर दुनिया को एक “बड़ा खतरे का संकेत” भेजने का आरोप लगाया है।

पीएलए रॉकेट फोर्स कैरेक्टरिस्टिक मेडिकल सेंटर की यह स्टडी पिछले शुक्रवार को ‘चाइनीज जर्नल ऑफ रेडियोलॉजिकल हेल्थ’ में प्रकाशित हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर वैश्विक परमाणु युद्ध की आशंका अपेक्षाकृत कम है। लेकिन शोधकर्ताओं ने चेताया कि भू-राजनीतिक या धार्मिक संघर्षों से प्रेरित छोटे या मध्यम आकार के परमाणु संपन्न (या संभावित परमाणु संपन्न) देश पड़ोसी देशों या प्रमुख शक्तियों के मुख्य शहरों पर एकल परमाणु-आतंकी हमला कर सकते हैं।

जापान की परमाणु नीतियों पर सवाल शोधकर्ताओं ने मुख्य चिंता के रूप में जापान का नाम लिया है। उनके मुताबिक, टोक्यो ने 2017 में परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते पर अब तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “जापान ने अभी तक परमाणु हथियारों के निषेध पर संधि को स्वीकार नहीं किया है। वर्तमान जापानी सरकार अपने ‘तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों’ के तहत ‘परमाणु हथियारों को शामिल न करने’ के सिद्धांत में संशोधन करने पर भी खुलेआम विचार कर रही है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक बड़ा खतरे का संकेत भेज रहा है।”

‘टैक्टिकल’ हमले का अंदेशा स्टडी में एक ऐसे परिदृश्य का मॉडल तैयार किया गया जिसमें चीन के किसी प्रमुख शहर पर छोटे स्तर के टैक्टिकल हथियारों का इस्तेमाल करके एकल, कम-क्षमता वाला (low-yield) परमाणु आतंकी हमला किया जाता है। 1945 के हिरोशिमा बम धमाके के ऐतिहासिक डेटा और दुनियाभर में किए गए सिमुलेशन के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि हमले के बाद मेडिकल टीमों को खतरनाक परिस्थितियों, व्यापक सामाजिक अव्यवस्था और जटिल चोटों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

मेडिकल इमरजेंसी और ‘कॉम्बैट रेडीनेस’ की सलाह परमाणु हमले में हताहतों के इलाज के लिए बीजिंग पहले ही 30 से अधिक बेस वाला एक आपातकालीन बचाव नेटवर्क स्थापित कर चुका है। लेकिन शोधकर्ताओं का तर्क है कि चीन को अधिक संसाधनों और विशेष ट्रेनिंग के साथ अपनी उपचार क्षमता का और विस्तार करना चाहिए।

स्टडी में सुझाव दिया गया है कि स्थानीय अधिकारियों को एंटीबायोटिक्स और रेडिएशन-सुरक्षा उपकरणों सहित आपातकालीन आपूर्ति का पर्याप्त स्टॉक रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें “कॉम्बैट रेडीनेस” (युद्ध की तैयारी) की स्थिति में रखा जाए। इसके अलावा, आपात स्थिति में तर्कहीन व्यवहार और घबराहट को कम करने के लिए जनता को परमाणु व विकिरण सुरक्षा और बचाव प्रोटोकॉल के बारे में शिक्षित करने पर जोर दिया गया है।

जापान पर खुफिया प्लूटोनियम बनाने का आरोप बीजिंग लंबे समय से टोक्यो पर “पुनर्सैन्यीकरण” (remilitarisation) का आरोप लगाता रहा है। इसी साल जनवरी में जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि जापान “शायद पहले ही गुप्त रूप से हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का उत्पादन कर चुका है” और उसके पास कम समय में परमाणु हथियार हासिल करने की तकनीकी और आर्थिक क्षमता है।

वैश्विक हथियारों की होड़ पर यूएन की चिंता जनवरी 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों – चीन, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस ने एक संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि “परमाणु युद्ध जीता नहीं जा सकता और इसे कभी नहीं लड़ा जाना चाहिए।”

हालांकि, नई रणनीतिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (New START treaty) के समाप्त होने के साथ ही वैश्विक हथियारों की नई होड़ का डर बढ़ गया है। अप्रैल में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी थी कि परमाणु प्रसार की गति तेज हो रही है। परमाणु अप्रसार संधि की समीक्षा के लिए आयोजित एक सभा में गुटेरेस ने कहा, “बहुत लंबे समय से, संधि का क्षरण हो रहा है। प्रतिबद्धताएं अधूरी हैं और विश्वास कम हो रहा है।”