September 15, 2026

‘हमारे ठिकानों पर हमला हुआ तो पलटवार तय’: ईरानी संसद के स्पीकर की अमेरिका को चेतावनी

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ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने अमेरिका को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान के तेल और गैस बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, तो पूरे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ऊर्जा हितों पर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। कालीबाफ ने यह बयान अमेरिकी रक्षा मंत्री (वॉर सेक्रेटरी) पीट हेगसेथ की हालिया धमकियों के जवाब में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी किया।

अमेरिकी रक्षा मंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया था कि ईरान का तेल टैंकर बेड़ा पूरी तरह असुरक्षित है और अमेरिकी लड़ाकू विमान, युद्धपोत व पनडुब्बियां उन पर कभी भी हमला करने में सक्षम हैं।

इस पर पलटवार करते हुए कालीबाफ ने कहा कि पूरे क्षेत्र में काम कर रही अमेरिकी तेल-गैस कंपनियां और उनसे जुड़े संयंत्र ईरान की पहुंच में हैं। कालीबाफ ने लिखा, “हमारे ठिकानों पर हमला करेंगे तो आप पर भी हमला होगा। सीधा गणित है—यहां तेल और गैस उत्पादन की पूरी श्रृंखला खुली और फैली हुई है।” उन्होंने जवाबी क्षमता का जिक्र करते हुए आगे कहा, “उन सैन्य ठिकानों से पूछिए जो अब काम करने लायक नहीं बचे हैं।”

होर्मुज जलडमरूमध्य पर तकरार कालीबाफ की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव चरम पर है। वैश्विक तेल आपूर्ति के इस अहम जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही को ईरान ने नियंत्रित कर रखा है।

17 जून को तेहरान और वॉशिंगटन ने पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के अनुच्छेद 5 के तहत इस जलमार्ग के प्रबंधन और इसे फिर से खोलने की जिम्मेदारी ईरान को सौंपी गई थी।

समझौते के उल्लंघन और नाकाबंदी का आरोप ईरानी पक्ष का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन करते हुए ओमान के तट के करीब एक असुरक्षित गलियारा बनाने की कोशिश की और दोबारा हवाई हमले शुरू कर देश की नौसैनिक नाकाबंदी कर दी। इन कदमों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी तरह के यातायात के लिए बंद घोषित कर दिया।

पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पाकनेजाद के मुताबिक, नौसैनिक नाकाबंदी के बावजूद ईरान तेल की ढुलाई जारी रखने में सफल रहा है। ईरान ने साफ किया है कि जलमार्ग को दोबारा खोला जाना पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिका समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता है या नहीं।