शिवपुरी में बड़ा खेल: कबाड़ी को बेचने ले जाई जा रहीं 5 क्विंटल सरकारी किताबें ग्रामीणों ने पकड़ीं
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के नरवर विकासखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त बांटी जाने वाली पाठ्यपुस्तकों को कथित तौर पर कबाड़ में बेचे जाने का प्रयास किया जा रहा था। टोरियाखुर्द के शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय से करीब 5 क्विंटल सरकारी किताबें लोडिंग वाहन में भरकर ले जाई जा रही थीं, जिन्हें ग्रामीणों ने रास्ते में ही रोककर हंगामा कर दिया।
वाहनों में भरे थे किताबों के बंडल, ग्रामीणों में आक्रोश ग्रामीणों को सूचना मिली थी कि टोरियाखुर्द के सरकारी स्कूल से एक लोडिंग टैक्सी में बोरियों और बंडलों में भरकर बड़ी मात्रा में किताबें ले जाई जा रही हैं। मौके पर पहुंचे लोगों ने वाहन को घेर लिया और उसकी तलाशी ली। वाहन में करीब 500 किलोग्राम पाठ्यपुस्तकें मिलने पर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि एक तरफ सरकारी स्कूलों में समय पर किताबें नहीं पहुंचने की शिकायतें आती हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार के करोड़ों रुपये से छपी इन किताबों को बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के ठिकाने लगाया जा रहा है।
शिक्षक की सफाई और गायब कागजात मौके पर मौजूद शिक्षक हरनाथ मौर्य ने अपनी सफाई में कहा कि वाहन में रखी सभी किताबें पुरानी और अनुपयोगी (रद्दी) थीं। शिक्षक का दावा था कि रद्दी सामग्री के निस्तारण के लिए विभागीय अनुमति ली गई है और नियमों के तहत ही काम हो रहा है। लेकिन, जब ग्रामीणों ने उनसे अनुमति संबंधी कोई लिखित आदेश या दस्तावेज दिखाने को कहा, तो शिक्षक कोई भी आधिकारिक कागज पेश नहीं कर सके।
क्या है सरकारी किताबों के निस्तारण का नियम? शिक्षा विभाग के नियमानुसार, सरकारी स्कूलों में पुरानी और अनुपयोगी किताबों को सीधे कबाड़ी को नहीं बेचा जा सकता। इसकी एक निर्धारित प्रक्रिया है:
- शाला प्रबंधन समिति (SMC) द्वारा प्रस्ताव पारित किया जाता है।
- वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति ली जाती है।
- अधिकृत समिति की मौजूदगी में पंचनामा तैयार होता है।
- नियमानुसार नीलामी की जाती है और इससे मिलने वाली राशि सीधे सरकारी खाते में जमा होती है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि इस मामले में किसी भी नियम का पालन नहीं किया गया।
अधिकारियों ने दिए जांच के आदेश इस गंभीर मामले पर जिला शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला परियोजना समन्वयक (DPC) दफेदार सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें किताबों को कबाड़ में बेचने संबंधी किसी आदेश की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और यदि नियमों का उल्लंघन या किसी शिक्षक की संलिप्तता पाई जाती है, तो सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
