September 15, 2026

राजस्थान पुलिस का नया SOP: जेन-जी और जेन-अल्फा छात्रों पर नहीं होगा लाठीचार्ज

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राजस्थान में स्कूल-कॉलेजों की बुनियादी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने वाले ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ पीढ़ी के छात्रों से निपटने के लिए पुलिस अपना तरीका बदलने जा रही है। राज्य का गृह विभाग एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहा है, जिसके तहत प्रदर्शनकारी छात्रों पर सीधे बल प्रयोग या लाठीचार्ज नहीं किया जाएगा। इसके बजाय पुलिस संवाद के जरिए समस्याओं का मौके पर ही समाधान निकालने का प्रयास करेगी।

छात्रों पर मुकदमे नहीं, दोस्त की तरह बात करेंगे अफसर नई एसओपी के लागू होने के बाद, छात्रों के प्रदर्शन की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अनुभवी अधिकारियों को मौके पर भेजा जाएगा। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश होगा कि वे बच्चों से पुलिसिया अंदाज में नहीं, बल्कि एक अभिभावक और दोस्त की तरह बात करें।

इस रणनीति का मुख्य जोर छात्रों पर कानूनी मुकदमे दर्ज न करने और उन पर किसी भी तरह का दबाव न बनाने पर होगा। सरकार का फोकस सिर्फ प्रदर्शन को बलपूर्वक खत्म कराने पर नहीं है, बल्कि उस मूल वजह को खत्म करने पर है जिसके कारण छात्र आंदोलन करने को मजबूर हुए हैं। हालांकि, यदि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति पैदा होती है, तो पुलिस के पास नियमानुसार कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा।

शिक्षकों की कमी और जर्जर भवन बने थे प्रदर्शन की वजह सरकार का यह कदम हाल ही में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुए स्कूली छात्रों के आक्रामक प्रदर्शनों के बाद उठाया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में अलवर के थानागाजी, जोधपुर के लूणी और भरतपुर में स्कूली बच्चों ने बड़े स्तर पर आंदोलन किए थे। इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से शिक्षकों की भारी कमी, स्कूलों के जर्जर भवन, पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया गया था। अब नई रणनीति के तहत संबंधित शिक्षा या प्रशासनिक विभाग के अधिकारियों को सीधे मौके पर जाकर इन समस्याओं का तत्काल समाधान निकालने के निर्देश दिए जाएंगे।

डिजिटल पीढ़ी और चुनावी माहौल का दबाव जेन-जी (1997 से 2012 के बीच जन्मे) और जेन-अल्फा (2012 के बाद जन्मे) पूरी तरह से डिजिटल युग में बड़ी हो रही पीढ़ियां हैं। पुलिस और छात्रों के बीच सड़क पर होने वाले किसी भी मामूली टकराव या लाठीचार्ज का वीडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो जाता है। ऐसे में एक स्थानीय स्कूल का मुद्दा रातों-रात प्रदेशव्यापी राजनीतिक रंग ले लेता है।

वर्तमान में राजस्थान में निकाय चुनाव चल रहे हैं और जल्द ही पंचायत चुनाव भी प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी हाल ही में युवाओं के साथ सीधा संवाद कर चुके हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में सरकार युवाओं और बच्चों के साथ किसी भी तरह के सीधे टकराव से बचना चाहती है, जिसका राजनीतिक फायदा विपक्षी दलों को मिल सके। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नई पीढ़ी की समस्याओं को कानून-व्यवस्था के डंडे से हांकने के बजाय, उनकी बात सुनकर प्रशासनिक स्तर पर हल किया जाए।