September 15, 2026

UPRNSS: एक ही काम के दो टेंडर, जिलों के नाम अलग-अलग, अरे भाई! एटा में ये कैसा ‘खेल’ हो गया?

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Eta News: अलग-अलग तारीखों में प्रकाशित एक ही काम के ये दो टेंडर भ्रष्टाचार और गंभीर लापरवाही के जिंदा सबूत हैं। दोनों टेंडरों के Name of Work कॉलम में एक ही काम के लिए अलग-अलग जिलों के नाम दर्ज हैं—एक में जिला जेल, अलीगढ़, जबकि दूसरे में जिला जेल, एटा। गड़बड़ियां सिर्फ जिलों के नाम में ही नहीं, बल्कि परत दर परत उधड़ती चली गईं, जब तत्कालीन एसडीएम, एटा, श्वेता सिंह की अगुवाई में मामले की जांच हुई। जांच में पाया गया कि योगेन्द्र बहादुर सिंह, अधिशासी अभियंता, उ.प्र. राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड (पैक्सफेड) प्रखण्ड एटा द्वारा लापरवाही और अनयिमितता करते हुए नियमों का उल्लंघन किया गया है। आपको बता दें कि भाजपा विधायक धीरेन्द्र सिंह लोधी ने जब अभियंता के कारनामों पर सवाल खड़े किए तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। आइए डिटेल में जानते हैं।

क्या है मामला?

दरअसल, योगेन्द्र बहादुर सिंह, अधिशासी अभियंता द्वारा 28 फरवरी 2026 को जिला कारागार एटा के निर्माण कार्यों के लिए कुल 8 कामों के टेंडर आमंत्रित किए गए। प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में ये टेंडर प्रकाशित तो हुए, पर उन निविदा सूचनाओं में कार्यों के नाम के कॉलम में जनपद कारागार अलीगढ़ अंकित किया गया, जबकि वह कार्य एटा जिले से संबंधित थे।

नियमों के अनुसार, यदि टेंडर प्रकाशित करने में कोई गड़बड़ी होती है तो उसे निरस्त कर फिर से टेंडर प्रकाशित किया जाना चाहिए। पर ऐसा नहीं हुआ और 23 मार्च 2026 को वही टेंडर फिर से आमंत्रित करने की कार्यवाही की गई। स्थानीय ठेकेदारों ने योगेन्द्र बहादुर की इस कार्यवाही का जमकर विरोध भी किया। एक बार टेंडर खुलने के बाद फिर वही टेंडर प्रकाशित किए जाने से पूरी प्रक्रिया ही संदेह के घेरे में आ गई।

एटा निवासी विद्याराम वर्मा ने डीएम से पूरे मामले की शिकायत कर दी। बीजेपी विधायक धीरेंद्र सिंह लोधी ने भी टेंडर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। फिर 7 अप्रैल 2026 को तत्कालीन एसडीएम श्वेता सिंह की अगुवाई में जांच समिति गठित की गई। समिति​ ने 29 अप्रैल 2026 को जांच रिपोर्ट भी सबमिट कर दी। जिसमें अधिशासी अभियंता योगेन्द्र बहादुर को नियमों के ​उल्लंघन का आरोपी पाया गया है।

जांच में ये गड़बड़ियां भी पाई गईं

—शुद्धि पत्र प्रकाशन से पहले त्रुटिपूर्ण निविदा सूचना को ई-टेण्डरिंग के जरिए निरस्तीकरण का आदेश प्रकाशित न करना।
—निविदा शुल्क पुन: आमंत्रित निविदा में समायाजित कर लेने का निर्णय।
—टेंडर में निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदारों की कैटेगरी तय न करना।
—सक्षम अधिकारी से निविदा सूचना का अनुमोदन प्राप्त न करने की कार्यवाही की गई।
—टेंडर प्रकाशन के लिए निदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, लखनऊ को भेजा जाना चाहिए था, जो उनके द्वारा नहीं किया गया।

एमडी से नहीं हो सका सम्पर्क

इस प्रकरण में जानकारी के लिए उ.प्र. राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड के एमडी वीके सिंह से दूरभाष के जरिए सम्पर्क करने की कोशिश कर गई। पर उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।