September 15, 2026

Bihar Flood: गंडक-कोसी में आईं अज्ञात मछलियां, खाने-बेचने पर रोक

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पटना : नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार के कई जिलों में हालात गंभीर बने हुए हैं। त्रिशूली नदी का जलस्तर बढ़ने और गंडक व कोसी रिवर सिस्टम के जरिए राज्य में पानी का बहाव तेज होने के बाद बिहार सरकार ने एक सख्त हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने लोगों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे बाढ़ के पानी से पकड़ी गई मछलियों को न तो पकड़ें, न खरीदें, न बेचें और न ही उनका सेवन करें। अधिकारियों का कहना है कि नेपाल से बहकर आने वाली ये मछलियां दूषित पानी के संपर्क में हैं, जिससे सेहत को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

मछलियां खाने से बीमार हो रहे हैं लोग

बाढ़ प्रभावित कई इलाकों से स्थानीय लोगों ने पानी में मछली की अनजान किस्में देखे जाने की सूचना दी है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ऐसी रिपोर्ट सामने आईं कि बाढ़ के पानी से निकाली गई मछलियों को खाने के बाद कुछ लोग बीमार पड़ गए हैं।

राज्य के पशु और मत्स्य संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बाढ़ के उफनते पानी में सीवेज, खतरनाक बैक्टीरिया, वायरस और विभिन्न प्रकार के पॉल्यूटेंट (प्रदूषक) घुले हुए हैं। नदियां, तालाब और जलाशय ओवरफ्लो होने से मछलियां नालियों, कचरे और मरे हुए जानवरों के संपर्क में आ गई हैं, जिससे वे जहरीली हो चुकी हैं।

सरकार के सुरक्षा दिशानिर्देश और अपील

प्रशासन ने नागरिकों के लिए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:

  • ऐसी किसी भी मछली का सेवन बिल्कुल न करें जिसकी प्रजाति या मूल स्थान (Origin) की जानकारी न हो।

  • बाढ़ के पानी से सीधे पकड़ी गई मछलियों की खरीद-फरोख्त पूरी तरह बंद करें।

  • अनजान किस्म की मछलियां दिखने पर उन्हें खाने से पहले मत्स्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें।

  • यदि किसी ने ऐसी मछली खाई है और उसे उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर आना या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

  • असामान्य या संदिग्ध मछलियां दिखने पर इसकी सूचना जिला प्रशासन या स्थानीय मत्स्य अधिकारियों को दें।

मलबा, बीमारियां और जल प्रदूषण का संकट

उफान पर बह रही गंडक और कोसी नदियां अपने साथ भारी मात्रा में मलबा, कीचड़, पत्थर, टूटे हुए वाहन, एलपीजी सिलेंडर और भूस्खलन से प्रभावित इमारतों के अवशेष बहाकर ला रही हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं कि दूषित बाढ़ का पानी ग्रामीण इलाकों के कुओं और हैंडपंपों में रिस सकता है, जिससे दस्त, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए व ई जैसी गंभीर जलजनित बीमारियां फैल सकती हैं। इसके अलावा, जगह-जगह पानी जमा होने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। नेपाल सीमा से लगे जिलों में पहले से ही ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक और आयरन की समस्या है, जिसे यह बाढ़ और बदतर बना सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करें।