September 15, 2026

पंजाब की वोटर लिस्ट में सांसद राघव चड्ढा का नाम ‘शिफ्टेड’ दर्ज

raghav chadha

आम आदमी पार्टी (AAP) से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम ‘शिफ्टेड’ यानी स्थानांतरित दर्ज किए जाने के बाद चड्ढा ने राज्य की ‘आप’ सरकार पर तीखे हमले किए हैं। उन्होंने इसे महज कोई क्लैरिकल गलती मानने से साफ इनकार करते हुए इसे सोची-समझी राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है।

‘वोटर लिस्ट पंजाब सरकार की निजी संपत्ति नहीं’ राघव चड्ढा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका वोटर आईडी कार्ड मोहाली में रजिस्टर्ड है, इसके बावजूद ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ बताया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “आप भले ही राज्य की सत्ता में हो, लेकिन पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची आपकी प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं है।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उनके नाम को हटाने या स्थानांतरित करने का फैसला किसने लिया, क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया में शामिल बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक सभी पदों पर पंजाब सरकार के ही अधिकारी तैनात हैं।

अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप चड्ढा का आरोप है कि पंजाब सरकार प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर के अधिकारियों से लेकर उच्च पद पर बैठे अफसरों तक को यह अच्छी तरह पता होता है कि चुनावी ड्यूटी खत्म होने के बाद उनके तबादले, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का ही प्रभाव रहता है। उनके मुताबिक, आप सरकार इसी प्रशासनिक तंत्र और अधिकारियों के जरिए राजनीतिक दबाव बनाकर विपक्षियों के खिलाफ बदले की भावना से काम करती है।

‘पार्टी छोड़ने की मिल रही सजा’ सांसद ने दावा किया कि जब से उन्होंने कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर ‘आप’ छोड़ी है, तब से पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनसे खफा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जैसे उन तमाम लोगों के खिलाफ पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्होंने पार्टी के खिलाफ चुप रहने से इनकार कर दिया था। चड्ढा के अनुसार, उनके अलावा ‘आप’ छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले अन्य नेताओं और सांसदों को भी इसी तरह निशाना बनाया जा रहा है।

ECI की गाइडलाइंस का हवाला, कहा- नियमों का जानबूझकर उल्लंघन अपने पक्ष में तर्क देते हुए राघव चड्ढा ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की गाइडलाइंस के पैराग्राफ 4(d) का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि इस नियम के तहत जनप्रतिनिधियों, जजों, सांसदों, विधायकों और प्रतिष्ठित हस्तियों के लिए एक ‘प्रोटेक्टेड लिस्ट’ का प्रावधान होता है, जिनके नाम पहले से डेटाबेस में चिन्हित होते हैं।

चड्ढा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक ऐसे विशिष्ट नामों को ड्राफ्ट सूची में शामिल किया जाना चाहिए था ताकि प्रक्रिया पूरी हो सके। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके मामले में नियमों की अनदेखी अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई है। हालांकि, उन्होंने राहत की बात यह भी कही कि फिलहाल यह केवल एक ड्राफ्ट मतदाता सूची है और अंतिम सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होनी है, जिसके लिए ‘दावे और आपत्तियों’ की प्रक्रिया अभी खुली हुई है।