September 15, 2026

पयागपुर विधानसभा: BJP की ‘हैट्रिक’ की तैयारी; जानें क्या है जातीय गणित

Payagpur Vidhan Sabha

बहराइच: जिले और चर्चित कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली पयागपुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपना एक अहम स्थान रखती है। 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर शुरुआत में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, लेकिन पिछले एक दशक से यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) का अभेद्य किला बन चुकी है। 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा यहां जीत की हैट्रिक लगाने के इरादे से चुनावी मैदान में उतरेगी, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) अपना सूखा खत्म करने की जद्दोजहद में है।

कैसरगंज के राजनीतिक वर्चस्व का असर

पयागपुर विधानसभा क्षेत्र कैसरगंज लोकसभा का अहम हिस्सा है, जहां से भाजपा के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह का लंबा राजनीतिक वर्चस्व रहा है। वर्तमान में उनके बेटे करण भूषण सिंह यहां से सांसद हैं। इस इलाके में बृजभूषण परिवार का सियासी प्रभाव पयागपुर की चुनावी हवा तय करने में हमेशा अहम भूमिका निभाता है। सीट के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो 2012 में यहां हुए पहले चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, लेकिन उसके बाद के दोनों चुनावों में भाजपा ने अपना दबदबा कायम किया।

2022 में कड़े मुकाबले में BJP के सुभाष त्रिपाठी ने मारी बाजी

2022 के विधानसभा चुनाव में पयागपुर सीट पर भाजपा और सपा के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। भाजपा ने अपने तत्कालीन विधायक सुभाष त्रिपाठी पर फिर से दांव लगाया, जबकि सपा ने मुकेश श्रीवास्तव को चुनावी अखाड़े में उतारा। बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने महिला उम्मीदवार गीता को टिकट दिया था।

इस कांटे की टक्कर में भाजपा के सुभाष त्रिपाठी ने 1,10,162 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने सपा के मुकेश श्रीवास्तव को 12,056 वोटों के अंतर से हराया, जिन्हें 98,106 वोट मिले थे। वहीं, बसपा प्रत्याशी गीता महज़ 11,232 वोटों तक ही सीमित रह गईं।

2017 की लहर में खिला था पहली बार ‘कमल’

पयागपुर में भाजपा का खाता 2017 की लहर में खुला था। उस चुनाव में सुभाष त्रिपाठी ने पार्टी को पहली बार इस सीट पर जीत दिलाई थी। उन्होंने 1,02,254 वोट हासिल कर सपा प्रत्याशी मुकेश श्रीवास्तव (60,713 वोट) को 41,541 वोटों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी थी। उस त्रिकोणीय मुकाबले में बसपा ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए मोहम्मद मुशर्रफ को मैदान में उतारा था, जो 29,122 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

जीत की चाबी हैं ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम वोटर

पयागपुर विधानसभा सीट का चुनावी गणित पूरी तरह से ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम मतदाताओं के इर्द-गिर्द घूमता है। जनसांख्यिकीय आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग 60 हजार है। इसके अलावा करीब 50 हजार दलित और 25 हजार मुस्लिम मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भाजपा इस जातीय गोलबंदी को अपने पक्ष में करने में सफल रही है, जिसके चलते सपा और बसपा के रणनीतिकारों को इस सीट पर अपनी चुनावी बिसात बिछाने में लगातार चुनौती का सामना करना पड़ा है।