September 15, 2026

भिनगा विधानसभा सीट: 2 दशक से BJP को जीत की तलाश, जानें समीकरण

bhinga shravasti

श्रावस्ती : उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले की भिनगा विधानसभा सीट राज्य की उन चर्चित सीटों में शुमार है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) पिछले दो दशकों से जीत का सूखा खत्म करने के लिए संघर्ष कर रही है। श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सीट एक समय भाजपा का मजबूत अभेद्य किला मानी जाती थी। 1989 से लेकर 2002 तक लगातार इस सीट पर भगवा परचम लहराता रहा। 2007 के चुनाव से पार्टी का जो विजय रथ यहां रुका, वह आज तक दोबारा पटरी पर नहीं लौट सका है। 2017 की प्रचंड लहर में भी भाजपा इस सीट को फतह नहीं कर पाई थी। 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी एक बार फिर इस सीट पर अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी कर रही है।

2022 का चुनाव: सपा की इंद्राणी देवी ने चटाई धूल

2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) ने भिनगा सीट पर अपना कब्जा जमाया। सपा प्रत्याशी इंद्राणी देवी ने भाजपा के पदमसेन चौधरी को सीधे मुकाबले में 13,574 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने इस चुनाव में अलीमुद्दीन अहमद को मैदान में उतारा था, लेकिन वे जीत के समीकरणों से काफी दूर रहे।

2022 चुनाव के प्रमुख आंकड़े:

  • इंद्राणी देवी (SP): 1,03,661 वोट (विजेता)

  • पदमसेन चौधरी (BJP): 90,087 वोट

  • अलीमुद्दीन अहमद (BSP): 21,547 वोट

2017 की लहर में बसपा ने मारी थी बाजी

2017 के विधानसभा चुनाव में जब पूरे उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की भारी लहर चल रही थी, तब भी भिनगा की जनता ने अलग जनादेश दिया था। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद असलम ने भाजपा उम्मीदवार अलकक्षेन्द्र सिंह को 6,090 वोटों के करीबी अंतर से मात दी थी। समाजवादी पार्टी ने उस वक्त भी इंद्राणी देवी पर भरोसा जताया था, लेकिन वे तीसरे स्थान पर खिसक गई थीं।

2017 चुनाव के प्रमुख आंकड़े:

  • मोहम्मद असलम (BSP): 76,040 वोट (विजेता)

  • अलकक्षेन्द्र सिंह (BJP): 69,950 वोट

  • इंद्राणी देवी (SP): 57,986 वोट

दलित और मुस्लिम वोटर तय करते हैं हार-जीत

भिनगा विधानसभा सीट के जातीय समीकरणों पर नजर डालें तो यहां दलित और मुस्लिम मतदाताओं का सीधा दबदबा है। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 60 हजार मुस्लिम और 50 हजार दलित मतदाता निवास करते हैं। यही दोनों वर्ग चुनाव में निर्णायक वोटबैंक माने जाते हैं। इनके अलावा क्षेत्र के ब्राह्मण और राजपूत मतदाता भी हार-जीत का अंतर तय करने में एक बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। सभी राजनीतिक दल इन्ही जातीय आंकड़ों के इर्द-गिर्द अपने उम्मीदवारों का चयन और चुनावी रणनीति तैयार करते हैं।