उतरौला विधानसभा: BJP की नजर हैट्रिक पर, जानें कुर्मी-मुस्लिम समीकरण
बलरामपुर : उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां और रणनीतियों का दौर तेज होने लगा है। 2027 के चुनाव में बलरामपुर जिले की चर्चित उतरौला विधानसभा सीट पर सभी की निगाहें टिकी रहने वाली हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस सीट पर लगातार तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाने की तैयारी में है। पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) में इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है।
इससे पहले यहां समाजवादी पार्टी (SP) का खासा दबदबा हुआ करता था। इस सीट का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) आज तक यहां से जीत का स्वाद नहीं चख सकी है। 2007 में जब मायावती के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी, उस ऐतिहासिक लहर में भी उतरौला सीट पर भाजपा ने ही बाजी मारी थी। वर्तमान में यहां से बीजेपी के रामप्रताप वर्मा विधायक हैं।
2022 का चुनाव: सपा को 21 हजार से ज्यादा वोटों से दी मात
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराते हुए जीत का सिलसिला बरकरार रखा। मौजूदा विधायक रामप्रताप वर्मा ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हसीब खान को 21 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।
2022 चुनाव के प्रमुख आंकड़े:
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रामप्रताप वर्मा (BJP): 87,162 वोट (विजेता)
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हसीब खान (SP): 65,393 वोट
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धीरू सिंह (Congress): 12,944 वोट
इस चुनाव में बीजेपी ने 21,769 वोटों के स्पष्ट अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे थे।
2017 में सपा और बसपा दोनों को पछाड़ा
2017 के चुनाव में ही भाजपा ने सपा के इस गढ़ में बड़ी सेंध लगाई थी और भारी बहुमत से सीट अपने नाम की थी। उस चुनाव में राम प्रताप वर्मा ने 29 हजार से अधिक वोटों के अंतर से एकतरफा जीत दर्ज की थी।
2017 चुनाव के प्रमुख आंकड़े:
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राम प्रताप वर्मा (BJP): 85,240 वोट (विजेता)
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आरिफ हाशमी (SP): 56,066 वोट
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परवेज उमर (BSP): 44,799 वोट
इस त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी की 29,174 वोटों से बड़ी जीत हुई थी। सपा दूसरे और बसपा तीसरे स्थान पर खिसक गई थी।
कुर्मी और मुस्लिम वोटर तय करते हैं हार-जीत
उतरौला विधानसभा सीट के जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां कुर्मी और मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा साफ नजर आता है। आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 60 हजार कुर्मी और 35 हजार मुस्लिम वोटर निवास करते हैं। चुनाव के समय इन दोनों समुदायों का रुख हार-जीत तय करने में बेहद अहम होता है। इनके अलावा ब्राह्मण और राजपूत मतदाता भी इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सभी राजनीतिक दल इन्ही समीकरणों के इर्द-गिर्द अपनी चुनावी बिसात बिछाते हैं।
