अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: ट्रंप के इम्तिहान से भारत पर क्या होगा असर?

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अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के लिए अर्ली वोटिंग के तहत करीब चार करोड़ मतदाता अपने मत का इस्तेमाल कर चुके हैं। तीन नवंबर को होने वाले मुख्य मतदान के बाद वोटों की गिनती शुरू होगी और भारत के समय के मुताबिक चार नवंबर की सुबह से चुनावी नतीजे आने शुरू हो जाएंगे। इस चुनाव पर दुनिया भर के साथ-साथ भारत की भी गहरी नज़र है, क्योंकि इसके नतीजों से तय होगा कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों में किसका नियंत्रण रहेगा।

मौजूदा समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के पास हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी निचले सदन और सीनेट यानी ऊपरी सदन दोनों में बहुमत है। निचले सदन की 435 और सीनेट की 35 सीटों के लिए हो रहे इन चुनावों में डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए चार-चार सीटों का नेट फायदा चाहिए। यदि रिपब्लिकन पार्टी इन चुनावों में बहुमत गंवा देती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए नीतिगत फैसले पास कराना काफी मुश्किल हो जाएगा।

संसद के गणित और भारत पर असर

अमेरिकी कांग्रेस का मुख्य काम देश भर में लागू होने वाले फेडरल कानून बनाना है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 435 सीटों में से फिलहाल 219 सीटें रिपब्लिकन के पास और 214 सीटें डेमोक्रेट्स के कब्जे में हैं, जबकि दो सीटें खाली हैं। वहीं, सीनेट की 100 सीटों में से 53 पर रिपब्लिकन और 45 पर डेमोक्रेट्स का कब्जा है, साथ ही दो निर्दलीय सीनेटरों का समर्थन भी डेमोक्रेटिक पार्टी को हासिल है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान भारत के साथ रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। हालांकि भारत को अमेरिका की दोनों ही प्रमुख पार्टियों का समर्थन मिलता रहा है, लेकिन टैरिफ और व्यापार नीतियों के मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के रुख से कई बार असहमतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में संसद में पार्टी के सदस्यों की संख्या कम होने या बहुमत बदलने का असर द्विपक्षीय वार्ताओं और फैसलों पर पड़ सकता है।

टैरिफ और व्यापारिक मोर्चे पर टकराव

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में ‘टैरिफ’ का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने भारत के हाई इंपोर्ट टैरिफ की आलोचना करते हुए उसे ‘टैरिफ किंग’ करार दिया था। रेसिप्रोकल टैरिफ के नाम पर अमेरिका ने स्टील, एल्युमीनियम, कपड़ा और ज्वैलरी जैसे भारतीय एक्सपोर्ट पर भारी टैरिफ लगा दिए और जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के तहत मिलने वाली छूट भी खत्म कर दी।

सितंबर 2026 में न्यूयॉर्क में ‘एशिया सोसाइटी’ के कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद और व्यापार नीतियों के मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन की खुलकर आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि अगर सहयोगी देश हमारी चिंताओं को नहीं समझता है, तो इसका असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हालिया भारत दौरे के दौरान स्पष्ट किया था कि टैरिफ किसी को सजा देने के लिए नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी व्यापक अमेरिकी विदेश नीति का हिस्सा हैं।

राष्ट्रपति की लोकप्रियता का पैमाना

मिडटर्म चुनाव अमूमन राष्ट्रपति के कामकाज का लिटमस टेस्ट माने जाते हैं। पोलिंग वेबसाइट सिल्वर बुलेटिन के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रंप ने अपना दूसरा कार्यकाल 50 फीसदी से थोड़ी ज्यादा अप्रूवल रेटिंग के साथ शुरू किया था, जो अक्टूबर की शुरुआत तक घटकर करीब 37 फीसदी रह गई, जबकि 61 फीसदी लोगों ने उन्हें नापसंद किया। इतिहास गवाह है कि अमेरिकी वोटर अक्सर राष्ट्रपति की पार्टी को सबक सिखाने के लिए विपक्षी रुख अपनाते हैं, और इन नतीजों से यह भी साफ हो जाएगा कि अमेरिकी जनता राष्ट्रपति के अब तक के फैसलों से कितनी संतुष्ट है।