मलेशिया: बिना हलाल सर्टिफिकेट चल रही थी चिकन फैक्ट्री, इलेक्ट्रिक शॉक देकर मारे जा रहे थे मुर्गे
मलेशिया में हलाल नियमों (Halal safeguards) के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुचोंग स्थित एक पोल्ट्री प्लांट में गंदगी और संदिग्ध स्लॉटरिंग (पशु वध) की शिकायत मिलने के बाद अधिकारियों ने पिछले हफ्ते छापा मारकर साढ़े छह टन से ज्यादा चिकन जब्त किया। आरोप है कि यह फैक्ट्री बिना हलाल सर्टिफिकेशन के कई सालों से चल रही थी और मुर्गों को काटने से पहले इलेक्ट्रिक शॉक देकर मारा जा रहा था, जो कि इस्लामिक नियमों के सख्त खिलाफ है।
रोजाना 40 हजार मुर्गों की हो रही थी सप्लाई
जांच में पता चला है कि यह प्लांट हर दिन 40,000 से अधिक मुर्गों की प्रोसेसिंग कर कुआलालंपुर की क्लैंग वैली में व्यवसायों को सप्लाई कर रहा था। मलेशिया के संघीय क्षेत्रों के मुफ्ती कार्यालय के अनुसार, पोल्ट्री के लिए इलेक्ट्रिक वाटर-बाथ स्टनिंग की अनुमति तभी है जब इससे पक्षी की मौत न हो। वध के समय उनका जिंदा होना ही तय करता है कि मीट हलाल है या नहीं। पुलिस अधिकारी मुहम्मद अब्दुल हलीम ने बताया कि प्लांट के वाटर-बाथ स्टनिंग सिस्टम में इलेक्ट्रिकल सेटिंग्स 60 वोल्ट और 130 वोल्ट पर पाई गईं, जो कि धार्मिक अधिकारियों द्वारा तय की गई सीमा से बहुत अधिक है।
गंदगी का अंबार, नोटिस को किया नजरअंदाज
‘सिन्हार हरियान’ (Sinar Harian) की रिपोर्ट के मुताबिक, फैक्ट्री के फर्श पर खून और पंख फैले हुए थे। इसके साथ ही, चिकन स्टोर करने वाले कंटेनरों में कीड़े और मक्खियां भिनभिना रही थीं। राज्य समाचार एजेंसी ‘बर्नामा’ (Bernama) के हवाले से वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह प्लांट एक दशक से ज्यादा समय से चल रहा था और मलेशिया के इस्लामिक विकास विभाग (Jakim) से कई बार नोटिस मिलने के बावजूद इसने नियमों का पालन नहीं किया।
सप्लाई नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने 12 विदेशी मजदूरों को हिरासत में लिया है और प्लांट के मलेशियाई मालिक का बयान दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की पहचान कर रही है, जिसमें वे सभी परिसर शामिल हैं जहां इस प्लांट से चिकन सप्लाई किया जा रहा था। सेलांगोर इस्लामिक धार्मिक परिषद के अध्यक्ष सालेहुद्दीन सईदीन ने बताया कि परिसर को दो सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। उन्होंने सभी रेस्तरां से इस प्लांट का चिकन इस्तेमाल तुरंत बंद करने की अपील की। सालेहुद्दीन ने संवाददाताओं से कहा, “इसका मतलब है कि वे आवश्यक इस्लामिक शिक्षाओं के विपरीत, जीवित मुर्गों के बजाय शवों को काट रहे थे।”
संसद में उठा मामला, सरकार का जवाब
इस मामले की गूंज सोमवार को संसद में भी सुनाई दी। पैन-मलेशियन इस्लामिक पार्टी (Pan-Malaysian Islamic Party) की सांसद सलामिह मोहम्मद नोर ने सवाल किया कि इस कंपनी का मालिक कौन है और इससे पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? उन्होंने ‘जकीम’ से पूछा कि बिना हलाल सर्टिफिकेशन के यह व्यवसाय इतने सालों तक कैसे चलता रहा।
इसके जवाब में धार्मिक मामलों के मंत्री जुल्कफ्ली हसन ने संसद को बताया कि हलाल परमिट लेना स्वैच्छिक है। इस वजह से अनसर्टिफाइड प्लांट का संचालन और बिक्री रिकॉर्ड ‘जकीम’ और राज्य के धार्मिक विभागों की सर्टिफिकेशन मॉनिटरिंग के दायरे से बाहर था। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्थानीय लाइसेंसिंग सहित कई एजेंसियों के सहयोग की जरूरत है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी पार्टी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
