अमेरिका-इजरायल के निशाने पर ईरान के परमाणु ठिकाने, पलटवार में तेहरान ने दी ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ की चेतावनी
पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर है। अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान के पावर प्लांट, तेल ठिकानों, परमाणु केंद्रों, मिसाइलों और ड्रोन पर बड़े हमले की सैन्य तैयारी कर रही हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संभावित हमले के जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उस पर दोबारा कार्रवाई हुई, तो वह दुनिया को अपना ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ दिखाएगा। इस हफ्ते अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की है, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं।
तीन दिन के सैन्य अभियान का खाका
कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान पर तीन दिन तक चलने वाला सैन्य अभियान उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। इसका मकसद ईरान को दबाव में लाकर समझौते के लिए तैयार करना है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इन योजनाओं की आधिकारिक पुष्टि से इनकार करते हुए कहा कि प्रशासन उन सैन्य रणनीतियों पर बात नहीं करना चाहता, जो हो भी सकती हैं और नहीं भी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है। नवंबर की शुरुआत तक तीन विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier), हजारों मरीन सैनिक, लड़ाकू विमान और विशेष सैन्य बल तैनात किए जाने की उम्मीद है।
ईरान का दावा: ‘हम दिखाएंगे फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’
अमेरिका की ओर से ईरान के गहरे अंडरग्राउंड परमाणु ठिकाने पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ के इस्तेमाल पर विचार करने की खबरों के बाद ईरान ने यह तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान से जुड़े मीडिया संस्थान स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क (SNN) के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता होसैन मोहब्बी ने कहा कि अमेरिका के पास ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ है, लेकिन ईरान दुनिया को ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ दिखाएगा। ईरान ने फिलहाल इस हथियार की क्षमता का खुलासा नहीं किया है। विशेषज्ञ भी अमेरिका के ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं कि जमीन के ऊपर विस्फोट करने वाला यह बम मजबूत चट्टानों के नीचे बने परमाणु ठिकानों को कितना नुकसान पहुंचा पाएगा।
’72 घंटे में खत्म नहीं होगा युद्ध’
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संसद में स्पष्ट किया कि दबाव और युद्ध के बावजूद उनका देश पीछे नहीं हटा है और अपने रुख पर कायम रहेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ईरान, पश्चिम एशिया और पूरी दुनिया के लिए अच्छे नहीं हैं। ईरान के वरिष्ठ सलाहकार महदी मोहम्मदी ने अमेरिका के 72 घंटे वाले सैन्य अभियान के विचार को खारिज कर दिया। उनके मुताबिक, ईरान की जवाबी कार्रवाई पहले से ज्यादा तेज और अलग तरीके की होगी।
परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अटका पेच
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका सैन्य कार्रवाई के दबाव का इस्तेमाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए करना चाहता है। दूसरी तरफ ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर तुरंत ढील देने के पक्ष में नहीं है। पहले हुई अमेरिकी-इजरायली सैन्य कार्रवाई से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें और महंगाई बढ़ने की खबरें आई थीं, जिसका असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर भी पड़ा था। अमेरिका के मध्यावधि चुनावों और राजनीतिक समीकरणों का असर भी सैन्य कार्रवाई की तारीख पर पड़ सकता है। इन घटनाक्रमों के बीच यह तय होना बाकी है कि ट्रंप ईरान पर नए हमले को मंजूरी देंगे या बातचीत को एक और मौका मिलेगा।
