ट्रंप ने खारिज किया ईरान का युद्धविराम प्रस्ताव, क्या शुरू होगी अप्रत्यक्ष बातचीत?

President Trump Departs Washington For G7 Summit In Canada

मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए ईरान की ओर से पेश किए गए नए युद्धविराम प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ठुकरा दिया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत की मेज पर आने से पहले ही ऐसी रियायतें मांग रहा था, जिन्हें अमेरिका किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकता। इन शर्तों में ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल थी।

‘ईरान ऐसी शर्तें रख रहा था जो मंजूर नहीं हो सकतीं’

एनबीसी न्यूज से बातचीत में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि तेहरान बातचीत दोबारा शुरू करने के बदले पहले ही नाकाबंदी खत्म करने और प्रतिबंध हटाने का दबाव बना रहा था। वॉल्ट्ज के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप को भरोसा नहीं है कि ईरान अपने वादों पर टिका रहेगा।

प्रस्ताव को खारिज करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व यह समझौता इसलिए करना चाहता है क्योंकि वे ‘बहुत बुरी तरह हार रहे हैं’। वॉल्ट्ज ने आगे कहा कि भले ही ट्रंप का भरोसा कम हुआ हो, लेकिन वे इस संघर्ष का समाधान किसी समझौते के जरिए ही निकालना चाहते हैं और इसके लिए अमेरिका सभी विकल्प खुले रखेगा।

ईरान का प्रस्ताव: संपत्तियों को जारी करने और प्रतिबंध हटाने की शर्त

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र में इस युद्धविराम प्रस्ताव की रूपरेखा रखी थी।

ईरान की मुख्य मांगों में शामिल हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को तत्काल बहाल करना।

  • ईरानी तेल निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना।

  • ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त करना।

ईरान ने इन शर्तों के पूरा होने पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा सभी जहाजों के लिए खोलने की पेशकश की थी।

ईरानी विदेश मंत्री का पलटवार: ‘ये शर्तें नहीं, हमारे अधिकार हैं’

अमेरिकी रुख के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने इन दावों को पुराना और अप्रमाणित करार देते हुए कहा कि यदि अमेरिका निश्चित कदम उठाता है, तो ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोलने को तैयार है।

अराघची ने कहा कि ये मांगें कोई नई या अचानक सामने आई शर्तें नहीं हैं, बल्कि ईरान केवल अपने उन वैध अधिकारों की बहाली चाहता है जो उसका हक हैं। हालांकि, उन्होंने बातचीत के भविष्य को लेकर निराशा जताते हुए कहा कि कूटनीति की गुंजाइश हमेशा रहती है, लेकिन पिछले दो वर्षों में अमेरिकी प्रशासन के रुख को देखते हुए ईरान के पास बातचीत शुरू करने का कोई ठोस आधार नहीं दिखता।

हवाई हमलों की चेतावनी के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की संभावना

प्रस्ताव खारिज करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले दोबारा शुरू करने के संकेत भी दिए हैं। हालांकि, अमेरिकी न्यूज पोर्टल ‘एक्सियोस’ से बातचीत में ट्रंप ने यह उम्मीद भी जताई कि अगले सप्ताह दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर शुरू हो सकती है।

एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच सोमवार से अप्रत्यक्ष बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसे में तनाव और सार्वजनिक बयानबाजी के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।