सपा से 150 सीटें मांगने की तैयारी में कांग्रेस; 100 से कम पर समझौते के मूड में नहीं पार्टी
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। एक तरफ जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपनी ‘रथ यात्रा’ का आगाज कर माहौल बनाना शुरू कर दिया है, वहीं कांग्रेस पूरे प्रदेश में ‘संगठन सृजन कार्यक्रम’ के जरिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को लामबंद कर रही है।
इसी बीच, दोनों दलों के बीच चुनावी गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, अक्टूबर के पहले हफ्ते से ही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीटों के तालमेल को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू होने जा रही है।
A, B और C कैटेगरी में सीटों की पहचान, 150 पर दावे की तैयारी
सीटों के बंटवारे के दौरान मोलभाव में कोई कमी न रहे, इसके लिए कांग्रेस ने पहले से होमवर्क पूरा कर लिया है। पार्टी ने राज्य की विधानसभा सीटों को A, B और C तीन श्रेणियों में बांटा है, ताकि बातचीत के मेज पर उम्मीदवारों की कमी का सवाल न उठे।
कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि पार्टी ने ‘A कैटेगरी’ की 150 मजबूत सीटों की पहचान कर ली है और शुरुआती बातचीत में वह सपा के सामने इतनी ही सीटों की मांग रखेगी। हालांकि, सूत्रों का यह भी कहना है कि बातचीत के दौरान पार्टी थोड़ा लचीला रुख अपना सकती है, लेकिन वह किसी भी परिस्थिति में 100 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं होगी।
2024 के लोकसभा नतीजों का हवाला दे रही कांग्रेस
कांग्रेस अपने इस दावे के पीछे हालिया चुनावी आंकड़ों का तर्क दे रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा ने बसपा और रालोद (RLD) के साथ ऐतिहासिक गठबंधन किया था, तब सपा को केवल 5 सीटें मिली थीं और अकेले लड़ी कांग्रेस को एक सीट हासिल हुई थी।
वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में जब सपा और कांग्रेस ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के तहत मिलकर लड़े, तो नतीजों में बड़ा उलटफेर हुआ। गठबंधन के तहत सपा ने रिकॉर्ड 37 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस के खाते में 6 सीटें आईं। कांग्रेस का मानना है कि सपा के इस शानदार प्रदर्शन में कांग्रेस के पारंपरिक वोटों और राष्ट्रव्यापी माहौल की बड़ी भूमिका रही है।
कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र गौतम ने स्पष्ट किया कि पार्टी का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश की सत्ता से ज्यादा 2029 में दिल्ली की सत्ता तक पहुंचना है, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी सीटों के सम्मानजनक बंटवारे पर किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं करेगी।
जमीनी समीकरण: दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम वोटों पर नजर
चुनावी तैयारियों के तहत कांग्रेस का मुख्य फोकस दलित, ब्राह्मण और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने पर है। इसके साथ ही मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने के लिए पार्टी ने अपने अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रमुख इमरान प्रतापगढ़ी और सांसद इमरान मसूद जैसे कद्दावर मुस्लिम चेहरों को आगे किया है, जिनके जरिए लगातार बड़े मुस्लिम नेताओं को पार्टी में शामिल कराया जा रहा है।
यात्राओं और बयानों को लेकर दबाव की राजनीति
सीट बंटवारे से पहले दोनों दलों के बीच बयानबाजी और सियासी दबाव का दौर भी तेज हो गया है। अखिलेश यादव द्वारा कांग्रेस के मजबूत गढ़ रायबरेली से रथ यात्रा शुरू किए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी पलटवार करते हुए कहा कि वे अपनी यात्रा सपा के गढ़ मैनपुरी और इटावा से शुरू करेंगे।
इसके जवाब में समाजवादी पार्टी की ओर से तंज कसा गया कि कोई भी कहीं से भी प्रचार शुरू कर सकता है, लेकिन कांग्रेस को इटावा और मैनपुरी में वोट नहीं मिलने वाले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सीटों का औपचारिक बंटवारा तय नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्षों की ओर से यह नूराकुश्ती जारी रहेगी। हालांकि, गठबंधन के फॉर्मूले और अंतिम सीट संख्या पर आखिरी फैसला राहुल गांधी और अखिलेश यादव की सीधी सहमति के बाद ही होगा।
